पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग, ममता के इस्तीफे के बिना कार्यकाल का अंत

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काेलकाता: ​पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने संविधान के अनुच्छेद १७४ के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए ७ मई, २०२६ से विधानसभा को भंग कर दिया है। राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को २०७ सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला है, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी हार को साजिश करार देते हुए पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। इस जिद के कारण राज्य में एक गंभीर संवैधानिक संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई थी, जिसे देखते हुए राज्यपाल ने कार्यकाल समाप्त होते ही सदन को भंग करने का आदेश जारी किया।
​विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना केवल एक प्रतीकात्मक विरोध है क्योंकि विधानसभा भंग होने के बाद वर्तमान सरकार का अस्तित्व स्वतः ही समाप्त हो जाता है। ऐसी स्थिति में राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन लगाने या नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार होता है। जहां एक ओर बीजेपी शनिवार को नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी कर रही है, वहीं ममता बनर्जी ने चुनावी नतीजों को कोर्ट में चुनौती देने और विपक्षी दलों के साथ मिलकर आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं। राज्यपाल के इस फैसले के साथ ही अब राज्य में नई निर्वाचित सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

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