मुंबई/नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का प्रभाव अब भारतीय विमानन क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैंपबेल विल्सन ने कहा है कि मौजूदा स्थिति से कंपनी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और इसका पूरा वित्तीय असर अभी सामने आना बाकी है।
कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में उन्होंने अनावश्यक खर्चों पर सख्त नियंत्रण रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सुरक्षित संचालन और लागत प्रबंधन कंपनी की प्राथमिकता होनी चाहिए।
ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच २८ फरवरी से बढ़े संघर्ष ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इसके चलते एयर इंडिया एक्सप्रेस सहित एयर इंडिया समूह को गंभीर परिचालन बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
सीईओ के अनुसार, पिछले तीन सप्ताह में लगभग 2,500 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं और वर्तमान में पश्चिम एशिया के लिए केवल 30 प्रतिशत उड़ानें ही संचालित हो रही हैं। कई हवाई क्षेत्र बंद हैं या सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं माने जा रहे।
हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों के कारण यूरोप, ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों को लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और लागत दोनों बढ़ गई हैं। विल्सन ने बताया कि विमान ईंधन की कीमतें दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं, जबकि इसका व्यापक वित्तीय प्रभाव अगले महीने से स्पष्ट रूप से सामने आने की संभावना है।
उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे इस कठिन समय में आपसी सहयोग बनाए रखें और यात्रियों को बेहतर सेवा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर न केवल एयरलाइंस बल्कि वैश्विक विमानन उद्योग पर भी गहराई से पड़ सकता है।









