ग्लासगो: राष्ट्रमंडल खेलों में दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतने का नीरज चोपड़ा का सपना पूरा नहीं हो सका। शुक्रवार देर रात हुई पुरुषों की भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) स्पर्धा के फाइनल में भारत के स्टार एथलीट नीरज कठिन परिस्थितियों के बीच अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं, सभी को चौंकाते हुए भारत के ही यशवीर सिंह ने अपने अंतिम प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह नीरज भले ही स्वर्ण जीतने से चूक गए, लेकिन जैवलिन थ्रो में भारत ने कुल २ पदक अपने नाम किए।
अपेक्षा के अनुरूप स्वर्ण पदक श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने जीता। टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण और पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले २८ वर्षीय नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में इस सत्र का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए ८५.८३ मीटर का थ्रो किया, जो रजत पदक के लिए पर्याप्त था। नीरज ने अपने पहले प्रयास में ८०.९७ मीटर, तीसरे प्रयास में ८१.२९ मीटर और चौथे प्रयास में ८०.७३ मीटर का थ्रो किया। इससे पहले वे १९ जून को दोहा डायमंड लीग में ८५.६९ मीटर के थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे थे।
स्पर्धा के फाइनल में नीरज के साथ यशवीर सिंह और रोहित यादव भी मैदान में उतरे थे। इन दोनों में से २४ वर्षीय यशवीर ने अपने छठे और अंतिम प्रयास में ८३.७२ मीटर का थ्रो कर सभी को हैरान कर दिया। वे पांचवें थ्रो तक ८१.३३ मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ सातवें स्थान पर थे, लेकिन अंतिम प्रयास के दम पर वे सीधे तीसरे स्थान पर पहुंच गए और कांस्य पदक जीत लिया। रोहित यादव ८१.५६ मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ समग्र रूप से सातवें स्थान पर रहे।
श्रीलंका के उभरते हुए खिलाड़ी रुमेश थरंगा पथिरागे ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए ८९.७५ मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। ठंडे मौसम के बावजूद उन्होंने असाधारण प्रदर्शन किया। इससे पहले उन्होंने जून में रोम डायमंड लीग में ९२.६२ मीटर का थ्रो किया था।
इस बीच, पाकिस्तान के मौजूदा चैंपियन और वर्तमान ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम तीसरे प्रयास के बाद ही पदक की दौड़ से बाहर हो गए। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो ७७.४१ मीटर का रहा। वहीं, त्रिनिदाद एंड टोबैगो के पूर्व विश्व चैंपियन केशोर्न वालकोट छठे स्थान पर रहे।









