​तृणमूल कांग्रेस में इस्तीफों की सुनामी; प्रकाश चिक बराइक ने भी छोड़ा पद, ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी राजनीतिक संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। गुरुवार को पार्टी को उस समय एक और बड़ा झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा के उपसभापति और सचिवालय के सभी अधिकारियों का उनके कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए इस चुनावी उलटफेर के बाद पार्टी के भीतर मची यह भगदड़ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार और संगठन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
​उल्लेखनीय है कि प्रकाश चिक बराइक से पहले भी तृणमूल कांग्रेस के कई शीर्ष नेता पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। इससे पहले राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिनकी असम के मुख्यमंत्री से हुई हालिया मुलाकात के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं। सुष्मिता देव ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी और वर्ष २०१४ में असम की सिलचर सीट से लोकसभा सांसद बनी थीं, जिसके बाद वर्ष २०२१ में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। इसी तरह, बीते ८ जून को तृणमूल कांग्रेस के अत्यंत वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद शुखेंदु शेखर रॉय ने भी पार्टी और अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने फैसले के पीछे राज्य के बदलते राजनीतिक हालात और जनता के जनादेश का हवाला देते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दों पर जनता में भारी असंतोष है। लगातार हो रहे इन बड़े इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की चिंता को अत्यधिक बढ़ा दिया है और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस आंतरिक असंतोष को जल्द ही नहीं संभाला गया, तो आने वाले दिनों में कई अन्य बड़े चेहरे भी पार्टी छोड़ सकते हैं।

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