ट्रंप बोले, ‘हमें उनकी कमी हमेशा महसूस होती रहेगी
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नई दिल्ली: अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर (राष्ट्रीय खुफिया निदेशक) तुलसी गबार्ड ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। पति को कैंसर होने का हवाला देते हुए उन्होंने पद से हटने का फैसला किया है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, गबार्ड के पति को हाल ही में बोन कैंसर (हड्डी के कैंसर) होने का पता चला है।
शुक्रवार को अपना त्यागपत्र सौंपते हुए गबार्ड ने उल्लेख किया है कि इस पारिवारिक संकट की घड़ी में उनका अपने पति के साथ रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा, “उनकी ताकत और प्यार ने हर चुनौती में मेरा साथ दिया है। मेरा विवेक यह गवाही नहीं देता कि वह इस कठिन लड़ाई का अकेले सामना करें और मैं इस डिमांडिंग और समय लेने वाले पद पर बनी रहूं।”
गबार्ड का इस्तीफा आगामी ३० जून से प्रभावी होगा। उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गबार्ड की कार्यक्षमता की जमकर तारीफ की है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “गबार्ड ने अपने पद पर रहते हुए बेहतरीन काम किया है। हमें उनकी कमी हमेशा महसूस होती रहेगी।” ट्रंप ने यह भी जानकारी दी कि गबार्ड के हटने के बाद प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर एरॉन लुकास कार्यवाहक डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सन २०२४ के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान गबार्ड ने ट्रंप का पुरजोर समर्थन किया था। इसके बाद सन २०२५ में ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने पर गबार्ड को अमेरिकी खुफिया तंत्र की सबसे शक्तिशाली हस्तियों में शामिल किया गया था। हालांकि, हाल के दिनों में जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, क्यूबा पर दबाव बढ़ाया और वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हटाने जैसे कदम उठाए, तब गबार्ड सार्वजनिक रूप से काफी कम दिखाई दीं।
गबार्ड ट्रंप प्रशासन में कैबिनेट छोड़ने वाली चौथी उच्च अधिकारी हैं। इससे पहले अप्रैल में श्रम मंत्री लोरी चावेज-डीरेमर, होमलैंड सिक्योरिटी मिनिस्टर क्रिस्टी नोएम और अटर्नी जनरल पाम बॉन्डी भी ट्रंप प्रशासन से अलग हो चुकी हैं।
सैन्य पृष्ठभूमि से राजनीति में आईं गबार्ड इराक युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना की मेडिकल यूनिट में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। वह सन २००२ में महज २१ साल की उम्र में हवाई की असेंबली के लिए चुनी गई थीं, जो कि एक रिकॉर्ड था। इसके बाद वह सन २०१३ से २०२१ तक डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से हवाई से कंग्रेस सदस्य रहीं और अमेरिकी कंग्रेस में पहुंचने वाली पहली हिंदू प्रतिनिधि बनीं।
विदेशी युद्धों में अमेरिकी हस्तक्षेप का मुखर विरोध करने वाली गबार्ड ने सन २०२२ में डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ दी थी और खुद को निर्दलीय घोषित कर दिया था। बाद में वह रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हो गईं और ट्रंप की प्रमुख सलाहकार व चुनावी अभियान का एक अहम हिस्सा बनीं। नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के रूप में उन्होंने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को छोटा और चुस्त बनाने के उद्देश्य से लगभग ५० फीसदी कर्मचारियों की कटौती की योजना की घोषणा भी की थी।











