जेलेंस्की ने लौटाया पोलैंड का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

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वारसा: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शनिवार को पोलैंड का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ वापस लौटा दिया है। जेलेंस्की ने यह कदम पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नावरोकी द्वारा उनसे यह सम्मान वापस लेने की आधिकारिक घोषणा के ठीक बाद उठाया।
​यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से सम्मान वापस लेने का यह तीखा फैसला द्वितीय विश्व युद्ध के समय की एक ऐतिहासिक घटना को लेकर दोनों देशों के बीच पैदा हुए गंभीर राजनयिक विवाद के चलते किया गया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में जेलेंस्की का वह निर्णय है, जिसके तहत उन्होंने यूक्रेनी सेना की एक विशेष यूनिट का नाम उस अर्धसैनिक बल के नाम पर रखने की मंजूरी दी थी, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड में भीषण नरसंहार को अंजाम दिया था।
​स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स का नाम बदलने पर आपत्ति
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बीते २६ मई को यूक्रेन के ‘स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स’ का नाम बदलकर ‘यूक्रेनियन इंसरजेंट आर्मी’ रखने का फैसला किया था। इतिहास के अनुसार, इसी आर्मी ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय पोलैंड की सीमा के भीतर बड़े पैमाने पर मासूम लोगों की बर्बरतापूर्वक हत्याएं की थीं। पोलैंड के वर्तमान प्रशासन ने इस कदम को अपनी ऐतिहासिक संवेदनाओं पर चोट माना।
​सन २०२३ में मिला था सम्मान
उल्लेखनीय है कि सन २०२३ में पोलैंड के तत्कालीन राष्ट्रपति आंद्रजेज डूडा ने मानवाधिकारों की रक्षा और दृढ़ता के लिए जेलेंस्की को इस सर्वोच्च राजकीय सम्मान से नवाजा था। द्वितीय विश्व युद्ध के कालखंड का यह विवाद ऐसे समय में दोबारा भड़का है, जब यूक्रेन पिछले ४ वर्षों से रूस के साथ सीधे युद्ध में उलझा हुआ है और उसके लाखों युद्ध पीड़ित नागरिकों ने पड़ोसी देश पोलैंड में शरण ले रखी है।

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