कोलकाता नगर निगम के इतिहास में नया अध्याय, महिला आईएएस बनीं कमिश्नर

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कोलकाता: कोलकाता नगर निगम के इतिहास में नया अध्याय दर्ज हुआ है। पहली बार कमिश्नर पद पर नियुक्त हुईं एक महिला अधिकारी स्मिता पांडे। बुधवार को निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार उन्हें कोलकाता कमिश्नर या कार्यकारी प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया। साथ ही वे उत्तर कोलकाता की जिला निर्वाचन अधिकारी का पद भी संभालेंगी, क्योंकि प्रचलित नियमों के अनुसार केएमसी कमिश्नर ही इस पद पर रहते हैं।
यहां उल्लेखनीय है कि पिछले पांच महीनों में कोलकाता नगर निगम में तीन बार कमिश्नर बदले गए हैं। लगभग डेढ़ वर्ष तक कोलकाता नगर निगम कमिश्नर रहने के बाद आईएएस अधिकारी धवल जैन को पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत में बीरभूम के जिलाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। उनके स्थान पर आईएएस अधिकारी सुमित गुप्ता आए। इस माह की ६ तारीख को आईएएस अधिकारी अनशुल गुप्ता कमिश्नर बने। मात्र बारह दिन के भीतर उन्हें भी हटा दिया गया। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उनकी जगह २००५ बैच की आईएएस अधिकारी स्मिता पांडे को नियुक्त किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, स्मिता पांडे संभवतः कोलकाता नगर निगम के लंबे इतिहास में पहली महिला कमिश्नर हैं। साथ ही वे विधानसभा चुनाव में उत्तर कोलकाता की जिला निर्वाचन अधिकारी (डीइओ) का दायित्व भी निभाएंगी।
बुधवार की दोपहर को नगर निगम की विदाई कमिश्नर अनशुल गुप्ता ने सभी नगर अधिकारियों के साथ बैठक की। सरकारी निर्देशिका के अनुसार, ६ मार्च को उन्होंने कमिश्नर का पद संभाला था। कुल मिलाकर उन्होंने मात्र बारह दिन ही इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया। नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इससे पहले १९९७ में एक आईएएस अधिकारी केवल चार दिनों के लिए कमिश्नर बने थे। इसके बाद से इतनी कम अवधि में कोई कमिश्नर नहीं रहा।
पूर्व कमिश्नर धवल जैन बीरभूम के जिलाधिकारी बनने के बाद उनके स्थान पर कमिश्नर का पद सुमित गुप्ता ने संभाला। वे इस पद पर चार महीने से कुछ अधिक समय तक रहे। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इतनी बार और इतनी कम अवधि में कमिश्नर बदलना नगर निगम के इतिहास में अभूतपूर्व है। वहीं, नगर निगम सेवा में सबसे उच्च प्रशासनिक पद कमिश्नर का ही है।
इस विषय में नगर निगम के कई अधिकारी बताते हैं कि लगातार सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर बदलाव सेवा की निरंतरता में बाधा डालता है। एक कमिश्नर के लिए कोलकाता नगर निगम जैसी संस्था के कामकाज को समझने में कम से कम तीन महीने लगते हैं। लगातार कमिश्नर बदलने से कई महत्वपूर्ण निर्णयों को लागू करना मुश्किल हो जाता है। फिलहाल, नगर अधिकारियों का काम नए कमिश्नर स्मिता पांडे के नेतृत्व में ही चल रहा है।

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