सिडनी: कोरल सागर में ६.४ तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।
राष्ट्रीय भूकंप मापन केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, मंगलवार सुबह कोरल सागर को केंद्र बनाकर यह भूकंप आया। भूकंप की गहराई जमीन से २३ नीचे थी। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, इस भूकंप के कारण बड़े पैमाने पर किसी भौतिक संरचना को नुकसान पहुंचने या जनहानि होने की कोई सूचना नहीं है।
एनसीएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि २० अक्टूबर २०२६ को भारतीय समयानुसार सुबह ९:५०:४० बजे ६.४ तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र १३.९७६ डिग्री दक्षिण अक्षांश और १६५.५५४ डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। भूकंप की गहराई २३ बताई गई है।
पृथ्वी के भीतर मौजूद दरारों या भ्रंश क्षेत्रों में लंबे समय से जमा तनाव के अचानक मुक्त होने पर भूकंप उत्पन्न होता है। इस प्रक्रिया के दौरान पैदा होने वाली भूकंपीय तरंगें तेजी से चारों ओर फैलती हैं। भूकंप का प्रभाव मुख्य रूप से उसकी तीव्रता, गहराई, आबादी वाले क्षेत्रों से दूरी और वहां की इमारतों की संरचनात्मक मजबूती जैसे महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करता है।
आमतौर पर कम गहराई पर आने वाले भूकंप अधिक गहराई पर आने वाले भूकंपों की तुलना में ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसका कारण यह है कि ऐसे भूकंपों की तरंगों को पृथ्वी की सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे प्रभावित क्षेत्र में जमीन का कंपन अधिक तीव्र हो सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियों और आसपास की इमारतों की निर्माण शैली पर भी निर्भर करता है।
भौगोलिक दृष्टि से कोरल सागर दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित है और यह ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास फैला हुआ है। प्रशांत महासागर के आसपास का यह विस्तृत क्षेत्र ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ यानी प्रशांत अग्नि वलय के निकट स्थित होने के कारण भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इस क्षेत्र में भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर देखने को मिलती हैं।





