कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई): ग्रामीण भारत के रूपांतरण की नई प्रेरक शक्ति

IMG-20260224-WA0026

नई दिल्ली: समावेशी ग्रामीण विकास की एक मूल प्रेरक शक्ति के रूप में एआई तेजी से महत्वपूर्ण बनती जा रही है। भारत प्रशासनिक क्षेत्रों में एआई के माध्यम से न्याय, जवाबदेही, पारदर्शिता और संदर्भ-आधारित जोखिम नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहा है। पंचायती राज, डिजिटल अवसंरचना और कल्याणकारी कार्यक्रमों में एआई पारदर्शिता, दक्षता, योजना निर्माण तथा जमीनी स्तर की भागीदारी को बढ़ा रही है। भाषिनी, भारतजेन और आदि वाणी जैसे बहुभाषी एवं वॉइस-आधारित प्लेटफॉर्म भाषा और साक्षरता की बाधाओं को दूर कर रहे हैं। राष्ट्रीय मिशन, क्षेत्र-विशेष पहल, राज्य स्तरीय नवाचार और एआई इम्पैक्ट समिट २०२६- इन सभी के माध्यम से जनकेंद्रित और समावेशी विकास के लक्ष्य की दिशा में एआई देश को समन्वित प्रगति की ओर अग्रसर कर रही है।
भारत में एआई प्रयोगात्मक चरण से आगे बढ़कर व्यापक जनकल्याणकारी उपयोग की दिशा में अग्रसर है। उन्नत सेवा वितरण के साथ-साथ, हाशिए पर रहने वाले समुदायों को मुख्यधारा में शामिल करते हुए कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय प्रशासन में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
समावेशी विकास के लिए राष्ट्रीय एआई नीति और शासन ढांचा:
राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति- नीति आयोग द्वारा प्रस्तुत इस रणनीति में मूलभूत सेवाओं की उपलब्धता, पहुंच और गुणवत्ता सुधार के लिए एआई के उपयोग पर बल दिया गया है। यह प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि सहयोग पर जोर देती है तथा कौशल विकास और डिजिटल रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देती है।
एआई संबंधी प्रशासनिक दिशा-निर्देश- वर्ष २०२५ में जारी दिशा-निर्देशों में न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही के आधार पर एआई उपयोग का नैतिक ढांचा निर्धारित किया गया है। इसमें कार्यान्वयन संबंधी निर्देश और जोखिम मूल्यांकन की व्यवस्था शामिल है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं में एआई के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित किया गया है।
ग्रामीण ई-शासन और विकेंद्रीकृत प्रशासन में एआई:
ग्राम पंचायतों के लिए एआई उपकरण- एआई टूल पंचायत बैठकों की कार्यवाही को स्वचालित रूप से तैयार करते हैं, जिससे निष्पक्ष अभिलेखीकरण सुनिश्चित होता है। योजना, बजट और संसाधन प्रबंधन के डिजिटलीकरण से डेटा-आधारित निर्णय लेना संभव हुआ है। राष्ट्रीय डेटा और एआई मॉडल भंडार प्रशासनिक समाधान प्रदान कर त्वरित विकास और सरकारी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।
ग्रामीण भारत में एआई अवसंरचना और क्षेत्रीय अनुप्रयोग:
उपग्रह-आधारित डेटा विश्लेषण के माध्यम से ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की निगरानी की जा रही है तथा संसाधन प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है। असंगठित श्रमिकों को सेवाएं प्रदान करने और आजीविका समर्थन में एआई एवं उन्नत तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
कृषि में एआई- मौसम पूर्वानुमान, कीट पहचान, फसल निगरानी और कृषि परामर्श के क्षेत्र में एआई के उपयोग से उत्पादन और आय में वृद्धि हो रही है।
शिक्षा और कौशल विकास- एआई-संयुक्त शिक्षण प्लेटफॉर्म छात्रों को भविष्य की आवश्यक कौशल प्राप्त करने में सहायता कर रहे हैं।
राज्य स्तरीय पहल:
विभिन्न राज्य स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार एआई समाधान अपना रहे हैं। मध्य प्रदेश का चैटबॉट मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराकर नागरिक सेवाओं में सुधार कर रहा है।
भाषाई समावेशन और बहुभाषी प्रशासन में एआई:
भाषिनी- अनुवाद, स्पीच-टू-टेक्स्ट और वॉइस सेवाओं के माध्यम से भाषिनी विभिन्न भारतीय भाषाओं में सरकारी सेवाओं को सुलभ बना रही है।
भाषिनी संचालन- यह सरकारी डिजिटल प्रणालियों में वॉइस-आधारित बहुभाषी तकनीक को एकीकृत कर सेवा वितरण को बेहतर बना रही है।
भारतजेन एआई- यह २२ भारतीय भाषाओं में उपयोग योग्य एक बड़ा भाषा मॉडल है, जो सरकारी और सामाजिक क्षेत्रों में समावेशी अनुप्रयोग को समर्थन देता है।
आदि वाणी- जनजातीय समुदायों के लिए विकसित यह एआई प्लेटफॉर्म जनजातीय भाषाओं में सेवाएं प्रदान कर शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन तक पहुंच बढ़ाता है तथा सांस्कृतिक विरासत संरक्षण में सहायक है।
उत्तरदायी और नैतिक उपयोग के माध्यम से एआई ग्रामीण भारत के रूपांतरण की एक प्रमुख आधारशिला बन रही है। उन्नत सेवा वितरण, सहभागी प्रशासन और आर्थिक समावेशन के जरिए यह असमानताओं को कम करते हुए भविष्य उन्मुख विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

About Author

Advertisement