मुम्बई: कुछ दिन पहले ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य में १६ वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सामाजिक माध्यमों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। किशोरावस्था में मन और मानसिकता दूषित न हो, इसे ध्यान में रखते हुए विश्व के कई देशों ने पहले ही सामाजिक माध्यमों के उपयोग पर सीमाएँ तय की हैं। इसी मुद्दे पर मुम्बई में आयोजित ‘लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर’ समारोह में अभिनेता आमिर खान ने अपना मत व्यक्त किया।
‘पीके’, ‘तारे ज़मीन पर’, ‘दंगल’ और ‘तीन इडियट्स’ जैसी अनेक फिल्मों के माध्यम से सामाजिक और मनोवैज्ञानिक जागरूकता का संदेश देने वाले आमिर खान ने इस बार डिजिटल युग में सामाजिक माध्यमों का बच्चों के मन पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा की। कार्यक्रम में देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में आमिर खान ने कहा, “सामाजिक माध्यमों ने हम सब पर गहरा प्रभाव डाला है। इसके कई लाभ हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब मैं सप्ताह में दो-तीन पुस्तकें पढ़ लिया करता था। शूटिंग पर जाते समय या नाश्ते के दौरान, चाहे कार्यक्रम कितना भी व्यस्त क्यों न हो, पढ़ने की आदत बनी रहती थी। लेकिन अब मैं या तो चलचित्र मंचों पर समय नष्ट करता हूँ या छोटी-छोटी चल चित्र झलकियाँ देखता रहता हूँ।”
उन्होंने आगे कहा कि यह जानते हुए भी कि सामाजिक माध्यमों का अत्यधिक उपयोग नहीं करना चाहिए, लोग उससे बच नहीं पाते। क्रमविन्यास प्रणाली के कारण व्यक्ति की पसंद के अनुसार आकर्षक वीडियो लगातार सामने आते रहते हैं और लोग उसी में उलझ जाते हैं। यह मानो मनुष्य को सम्मोहित करने जैसा है।
आमिर खान यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, “मैं सामाजिक माध्यमों के विरुद्ध नहीं हूँ, लेकिन अब इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है। अनेक देशों ने इस दिशा में कदम उठाया है और मुझे लगता है कि उन्होंने सही किया है, क्योंकि इससे बच्चों का मन और मस्तिष्क प्रभावित हो रहा है। मैं यह नहीं कह रहा कि अपराध या भ्रष्टाचार केवल हमारे देश की समस्या है। यह मनोविज्ञान के एक स्तर से जुड़ा विषय है। और भ्रष्टाचार केवल धन से ही नहीं होता, बल्कि मन और मानसिकता का भी भ्रष्टाचार होता है। जैसे इन दिनों हम एपस्टीन प्रकरण के बारे में लगातार जान रहे हैं।”
आमिर के इन विचारों से देवेंद्र फडणवीस ने भी सहमति जताई।










