कश्मीरी पंडितों की भावुक घर वापसी और पुनर्वास की नई उम्मीद

10789-nasir-aslam-wani-advocates-reviving-apex-committee-kashmiri-pandits-return

नई दिल्ली: ​तीन दशक से भी अधिक लंबे विस्थापन के बाद कश्मीरी पंडितों का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल अपनी जन्मभूमि कश्मीर लौटा है। अमेरिका और यूरोप सहित दुनिया के विभिन्न देशों से आए इन विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं ने जब 36 साल बाद पहली बार अपनी मातृभूमि की मिट्टी को छुआ, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। अपने बचपन की गलियों, वर्षों से बंद पड़े पैतृक घरों और पुरानी यादों को ताजा करते हुए कई लोगों की आंखें नम हो गईं। यह समूह पिछले तीन दिनों से दक्षिण, मध्य और उत्तरी कश्मीर के विभिन्न इलाकों का दौरा कर रहा है और स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित कर रहा है।
​यह यात्रा केवल एक भावनात्मक मिलन नहीं, बल्कि घाटी में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी की संभावनाओं को टटोलने का एक गंभीर प्रयास है। अतीत में डर और असुरक्षा के कारण जो लोग कभी वापस नहीं लौट पाए थे, उन्हें इस बार जमीनी हालात में सकारात्मक बदलाव महसूस हुआ है। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल का मानना है कि उनकी स्थायी और सफल वापसी तभी संभव है, जब कश्मीर की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी उन्हें खुले दिल से स्वीकार करे और पुराने आपसी भाईचारे के रिश्तों को फिर से जोड़ा जाए। उनका कहना है कि दुनिया भर की सुख-सुविधाएं एक तरफ, लेकिन अपनी जड़ों और मातृभूमि से जुड़ने का जो सुकून है, वह कहीं और नहीं मिल सकता।
​इसी सिलसिले में श्रीनगर के एसकेआईसीसी में दो दिवसीय विशेष सम्मेलन का आयोजन किया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी हिस्सा ले रहे हैं। इस ऐतिहासिक समागम में विस्थापितों के पुनर्वास और उनकी गरिमापूर्ण वापसी के ब्लूप्रिंट पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस दौरे और सम्मेलन के समापन के बाद, प्रतिनिधिमंडल अपनी टिप्पणियों, चिंताओं और महत्वपूर्ण सुझावों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा। यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से गृह मंत्री अमित शाह को सौंपी जाएगी, जिससे वर्षों से लंबित इस संवेदनशील मुद्दे के स्थायी और ठोस समाधान का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।

About Author

Advertisement