काठमांडू: नेपाल के सर्वोच्च अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सरकार के नाम ‘कारण बताओ’ आदेश जारी किया है।
यह याचिका उनकी पत्नी राधिका शाक्य द्वारा दायर की गई थी, जिस पर सोमवार को न्यायाधीश मेघराज पोखरेल की एकल पीठ में सुनवाई हुई।
अदालत ने पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक की रिहाई की मांग वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर भी इसी प्रकार का आदेश जारी किया है।
सर्वोच्च अदालत के सहायक प्रवक्ता निराजन पाण्डे के अनुसार, दोनों मामलों में सरकार से तीन दिन के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है। इस आदेश के बाद दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई की संभावना समाप्त हो गई है।
अदालत ने क्या कहा
अदालत ने पूछा है कि बंदी प्रत्यक्षीकरण आदेश क्यों जारी न किया जाए। साथ ही सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह महान्यायाधिवक्ता कार्यालय के माध्यम से तीन दिन के भीतर जवाब दाखिल करे।
अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी में मुलुकी फौजदारी कार्यविधि संहिता, २०७४ की धारा ९(६) का पालन हुआ या नहीं, इसका स्पष्ट आधार प्रस्तुत किया जाए।
इसके अलावा, अदालत ने सेप्टेम्बर ८ और ९ की घटनाओं की जांच के लिए गठित कार्की आयोग की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज पेश करने का आदेश दिया है।
रमेश लेखक मामले में आदेश
रमेश लेखक की ओर से दायर याचिका पर न्यायाधीश कुमार रेग्मी की पीठ ने भी सरकार को तीन दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। यह मामला अब संयुक्त इजलास में सुना जाएगा।
गिरफ्तारी और जांच
सरकार ने कार्की आयोग की सिफारिश के आधार पर शनिवार सुबह ओली और लेखक को गिरफ्तार किया था।
इसके बाद काठमांडू जिला अदालत ने दोनों को पांच दिन की पुलिस हिरासत में रखने की अनुमति दी।
कानूनी पक्ष का तर्क
ओली और लेखक के वकीलों का कहना है कि गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ है और इसमें राजनीतिक पूर्वाग्रह शामिल है। उनका तर्क है कि दोनों नेताओं के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई आपराधिक मामला नहीं बनता और उन्हें हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है।









