नई दिल्ली: ईरान और सऊदी अरब के बीच २०२३ में चीन की मध्यस्थता से हुआ ऐतिहासिक सुलह समझौता अब लगभग टूटता दिख रहा है। हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर तेजी से बढ़ गया है।
प्राप्त जानकारीअनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में ईरान द्वारा किए गए हमलों के बाद सऊदी अरब ने कड़ा रुख अपनाया है और दोनों देशों के बीच विश्वास लगभग खत्म होने की बात कही जा रही है।
सऊदी विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान ने कहा कि “तनाव का जवाब तनाव से दिया जाएगा” और ईरान को अब रणनीतिक साझेदार नहीं माना जा सकता।
विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्ष, अमेरिकी-इज़राइली सैन्य कार्रवाइयाँ और खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताएँ इस तनाव को और बढ़ा रही हैं।








