नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ जारी टकराव अमेरिका के लिए बेहद महंगा साबित हो रहा है। एक नए विश्लेषण के अनुसार, युद्ध के शुरुआती दो हफ्तों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों से लगभग ८०० मिलियन डॉलर (करीब ७५०० करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है।
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज और बीबीसी के विश्लेषण में बताया गया है कि यह नुकसान मुख्य रूप से ईरान के जवाबी हमलों के कारण हुआ, जो अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद शुरू हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब समेत कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में एयर-डिफेंस सिस्टम, सैटेलाइट संचार व्यवस्था और विमान जैसी अहम सैन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।
सबसे बड़ा नुकसान जॉर्डन के एक एयरबेस पर हुआ, जहां अमेरिका के अत्याधुनिक थाड मिसाइल डिफेंस सिस्टम के रडार को निशाना बनाया गया। इस रडार सिस्टम की कीमत लगभग ४८५ मिलियन डॉलर बताई जाती है।
इसके अलावा, कुवैत के अली अल-सलीम, कतर के अल-उदीद और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर भी कई बार हमले किए गए, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची। अनुमान है कि इन ठिकानों के ढांचे और सुविधाओं को लगभग ३१० मिलियन डॉलर का अतिरिक्त नुकसान हुआ।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह युद्ध चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि रूस ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों की जानकारी ईरान के साथ साझा की, जिससे हमले और प्रभावी हो सके।
युद्ध के बढ़ते दायरे और लगातार हो रहे हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को और गहरा कर दिया है, जिससे आने वाले समय में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।








