नई दिल्ली: आज केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट प्रस्तुत करेंगी। वह एक बार फिर देश की महिला वित्त मंत्री के रूप में बजट पेश करने जा रही हैं। इस वर्ष के बजट में महिलाओं के सशक्तीकरण पर सरकार कितना जोर देती है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ महिलाएँ हैं। उनके बारे में सरकार क्या सोचती है, यह अहम होगा। रोजगार में महिलाओं की प्रगति, शिक्षा, उद्यमिता और व्यवसाय—हर क्षेत्र में बजट क्या प्रावधान करता है, इस पर खास ध्यान रहेगा। इसलिए बजट से महिलाओं को क्या मिलेगा, यह सभी के लिए चर्चा का विषय है।
उद्योग जगत का मानना है कि इस बार के बजट में महिला स्टार्टअप्स की प्रगति पर विशेष फोकस किया जाएगा और उन्हें अतिरिक्त सुविधाएँ दी जा सकती हैं। बड़ी संख्या में महिलाएँ एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) से जुड़ी हुई हैं। इस क्षेत्र को लेकर सरकार कितना ध्यान देती है, यह भी सभी की नजर में रहेगा।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि बजट में महिलाओं को और अधिक आर्थिक सशक्तीकरण दिया जा सकता है। इसके तहत क्रेडिट गारंटी को ५ करोड़ रुपये से बढ़ाकर १० करोड़ रुपये तक किया जा सकता है। छोटे उद्योगों से जुड़ी महिलाओं के लिए निवेश सीमा भी बजट में शामिल हो सकती है, जो वर्तमान २.५ करोड़ रुपये से बढ़कर १० करोड़ रुपये तक हो सकती है।
इसके अलावा एससी/एसटी वर्ग की महिलाओं पर सरकार कितना ध्यान देती है, इस पर भी सभी की निगाहें रहेंगी। आगामी पांच वर्षों तक केंद्र की आर्थिक नीतियाँ उसी के अनुरूप तय होंगी। २०२६ का बजट देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में नई गति देने की उम्मीद जगाता है। इस प्रक्रिया में महिलाओं को कहां और कितना लाभ मिलेगा, यह देखना बाकी है।
लेकिन एक बड़ा सवाल यह भी है कि इस वर्ष के बजट से वेतनभोगी वर्ग को क्या मिलेगा? क्या उन्हें आयकर में अच्छी राहत मिलेगी? यदि सरकार उस दिशा में कदम नहीं उठाती है, तो इसका उन पर कितना असर पड़ेगा, यह सवाल उठ रहा है।
कर विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार के बजट में आयकर छूट को लेकर सरकार बड़े बदलाव की योजना नहीं बना रही है। इसलिए पुराने कर ढांचे पर ही जोर दिए जाने की संभावना है। फिलहाल १२ लाख रुपये तक की कर छूट का प्रावधान है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीमा और बढ़ाई जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो वेतनभोगी वर्ग को और अधिक राहत मिलेगी।
हर बजट के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) अपना विश्लेषण करता है, जिसके आधार पर देश की अर्थव्यवस्था और आगे के कदम तय होते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार के बजट में कर संरचना को लेकर बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। पुराने कर दरों को बनाए रखते हुए नया कर कानून लाया जा सकता है।
चूंकि आयकर पर सबसे अधिक ध्यान रहता है, इसलिए सामान्य वेतनभोगी वर्ग इस बार के बजट से बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं कर पा रहा है। बजट पेश होते ही देशवासियों की नजर आयकर छूट पर टिकी रहेगी। लेकिन कुल मिलाकर माना जा रहा है कि इस बार का बजट बहुत बड़ी परेशानियाँ खड़ी नहीं करेगा। बजट का मुख्य फोकस हमेशा आयकर पर रहता है, इसलिए इस बार भी पुराना कर ढांचा बरकरार रहेगा या नहीं, इसी पर सभी की नजरें रहेंगी।










