आज जादवपुर में ‘पीस टॉक’ पर टिकी नजरें, सोमवार को आमने-सामने होंगे १४ पक्ष

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कोलकाता: जादवपुर विश्वविद्यालय में हिंसा के बाद सोमवार को प्रस्तावित ‘शांति वार्ता’ (पीस टॉक) अब केवल सामान्य स्थिति बहाल करने की कवायद नहीं रह गयी है। दोपहर करीब ३ बजे अरविंद भवन में कुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य की अगुवाई में होने वाली बैठक में करीब १४ हितधारकों को बुलाया गया है। एसएफआई, एआईडीएसओ, एसयूसीआई, एबीवीपी, आरएसएस, एआईसीपी और जूटा समेत विभिन्न संगठनों की मौजूदगी में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कैंपस में संवाद का माहौल तैयार करना होगी।
​सूत्रों के मुताबिक, वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई बैठक में विशेष जांच कमेटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के साथ उसमें छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग करेगा। यानी शांति बहाली के साथ जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी बैठक का अहम मुद्दा बन सकती है। दूसरी ओर, एबीवीपी पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यदि किसी छात्र संगठन को वार्ता में शामिल किया गया तो वह विरोध करेगा।
​वहीं, वामपंथी छात्र संगठनों में भी कथित एकतरफा रवैये को लेकर असंतोष है और बैठक के बाद आंदोलन की तैयारी की चर्चा है। उधर, शिक्षक संगठन ‘जुटा’ की ओर से राज्य वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता के वक्तव्य का समर्थन करते हुए बाहरी तत्वों को कैंपस में प्रवेश करने से रोकने की मांग रखी जाएगी।
​ऐसे में सोमवार की ‘शांति वार्ता’ के सामने दोहरी चुनौती है- एक ओर हिंसा के बाद सामान्य माहौल लौटाना और दूसरी ओर परस्पर अविश्वास को कम करना। यदि सभी पक्ष अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति से ऊपर उठकर संवाद नहीं कर पाते, तो शांति की पहल खुद नए टकराव का मंच बन सकती है।

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