गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कूचबिहार स्थित ऐतिहासिक मधुपुर सत्र को बटद्रवा की तर्ज पर विकसित कर उत्तर-पूर्व भारत के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में से एक के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया फेसबुक पर जारी एक संदेश में कहा कि मधुपुर सत्र असमिया सभ्यता, संस्कृति और महापुरुषों के महान आदर्शों का जीवंत प्रतीक है। एकशरण नामधर्म द्वारा दिए गए भक्ति, समानता, ज्ञान और सांस्कृतिक समन्वय के संदेश की प्रतिध्वनि आज भी इस पवित्र भूमि से सुनाई देती है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव, श्रीश्री माधवदेव और श्रीश्री दामोदरदेव से जुड़े मधुपुर का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व असम के लोगों की गहरी भावनाओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने उल्लेख किया कि शंकरदेव अपने जीवन का अंतिम समय मधुपुर में बिताना चाहते थे। यह प्रसंग भी इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व को और अधिक गहरा बनाता है।
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, विकास के साथ-साथ ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए मधुपुर सत्र के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और समग्र बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक व्यापक योजना तैयार की गई है।
इसी क्रम में मधुपुर सत्र में पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री निशीथ प्रमाणिक, मालती राभा राय तथा असम सरकार के मंत्री अशोक सिंघल और अश्विनी राय सरकार के साथ सत्र के संरक्षण एवं विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है, मुख्यमंत्री सरमा ने बताया।
असम और पश्चिम बंगाल सरकार के आपसी सहयोग एवं समन्वय से मधुपुर को बटद्रवा की तर्ज पर एक बड़े सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा, ऐसा विश्वास उन्होंने व्यक्त किया।
मधुपुर के संरक्षण और विकास से ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित विकास योजना का लक्ष्य मधुपुर को उत्तर-पूर्व भारत के एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।





