अरुणाचल ने जारी की २०२५–३५ की तीन नीतियां
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश सरकार ने कृषि, बागवानी तथा मधुमक्खी पालन क्षेत्र में बदलाव को गति देने के उद्देश्य से कृषि नीति २०२५–३५, बागवानी नीति२०२५–३५ तथा मधुमक्खी पालन एवं शहद नीति २०२५–३५ जारी की है।
राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोशल मीडिया फेसबुक के माध्यम से इन नीतियों की घोषणा करते हुए कहा कि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री खांडू के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में कृषि, बागवानी और शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं को व्यावसायिक अवसरों में बदलने के लिए नई नीतियां दीर्घकालिक रोडमैप का काम करेंगी। उन्होंने कहा कि नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों की आय और आजीविका में सुधार के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी और मजबूत बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि कृषि क्षेत्र की संभावनाओं को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए इसे किसानों के जीवन स्तर में सुधार, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने और राज्य को अधिक समृद्ध बनाने के व्यापक अभियान से जोड़ना जरूरी है।
इसी क्रम में नाहरलागुन स्थित कृषि निदेशालय में ‘स्टेट एग्रीकल्चर इन्फॉर्मेशन हब-कम-फार्मर्स हॉस्टल’ का भी उद्घाटन किया गया। किसानों को कृषि तकनीक, सूचनाओं और आवश्यक सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित यह केंद्र कृषि क्षेत्र में सूचना प्रसार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
नई तीनों नीतियां अरुणाचल प्रदेश की भौगोलिक एवं प्राकृतिक विशेषताओं का उपयोग करते हुए कृषि, बागवानी और मधुमक्खी पालन को टिकाऊ तथा आय-केंद्रित क्षेत्रों में बदलने की सरकार की दीर्घकालिक सोच को आगे बढ़ाती हैं।
मुख्यमंत्री खांडू के वक्तव्य का सार यही है कि अरुणाचल की प्राकृतिक संभावनाओं को किसानों की समृद्धि से जोड़ते हुए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को ग्रामीण आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनाया जाए।





