नई दिल्ली: ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ पर्दे के पीछे चल रही गुप्त शांति वार्ताओं का विवरण सार्वजनिक कर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया है कि उच्च स्तरीय मध्यस्थता के बावजूद तेहरान और वाशिंगटन के बीच वैचारिक और कार्यप्रणाली से जुड़ी दूरियां बेहद गहरी बनी हुई हैं। इसके साथ ही ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि ईरान घुटने टेक चुका है। प्रवक्ता बगाई ने किसी भी त्वरित सफलता की संभावना को नकारते हुए कहा कि बातचीत अभी किसी अंतिम समाधान के करीब नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में लगातार जारी सैन्य जमावड़े और अतीत में हुए संघर्ष विराम के उल्लंघनों के कारण दोनों पक्षों के बीच भरोसे की भारी कमी है, जिससे अगले कुछ हफ्तों या महीनों में किसी औपचारिक युद्धविराम की उम्मीद करना मुश्किल है।
इंटेलिजेंस स्रोतों के हवाले से सामने आई खबरों के मुताबिक यह बेहद संवेदनशील शांति प्रक्रिया पूरी तरह से एक अप्रत्यक्ष ढांचे के तहत आगे बढ़ रही है, जिसमें वर्तमान में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों पक्षों के बीच सीधे संवाद के बजाय औपचारिक संदेश और राजनयिक दस्तावेज मध्यस्थ के जरिए ही भेजे जा रहे हैं। ईरानी नेतृत्व इस समय ह्वाइट हाउस से मिले उस ताजा जवाब की समीक्षा कर रहा है, जो तेहरान द्वारा इसी महीने की शुरुआत में संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए पेश किए गए १४-सूत्रीय शांति प्रस्ताव के संदर्भ में आया है। कूटनीतिक बातचीत को तत्काल टूटने से बचाने के लिए दोनों देशों ने परमाणु विवाद जैसे जटिल मुद्दों को फिलहाल किनारे रख दिया है और उनका पूरा ध्यान फिर से लड़ाई शुरू होने से रोकने, स्थानीय स्तर पर सैनिकों को पीछे हटाने तथा होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बहाल करने पर है।
मौजूदा कूटनीतिक प्रयासों में मुख्य अड़चन अभी भी ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार और परमाणु शोधन के उसके घरेलू अधिकार को लेकर बनी हुई है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने शर्त रखी है कि प्रतिबंध हटाने के लिए ईरान को इस संवर्धित सामग्री को देश से बाहर निकालना होगा, जिसे तेहरान के वार्ताकारों ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान अपनी घरेलू संवर्धन क्षमताओं को एक संप्रभु अधिकार मानता है जिसे किसी अस्थायी सैन्य विराम के बदले छोड़ा नहीं जा सकता। हालांकि पाकिस्तान की बैकचैनल कूटनीति ने दोनों धुर विरोधियों के बीच बातचीत का रास्ता जरूर बनाया है, लेकिन ईरान के रुख से साफ है कि कोई औपचारिक लिखित समझौता अभी दूर है। दूसरी ओर, वाशिंगटन में सैन्य हलचल तेज होने और राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अपनी वीकेंड की छुट्टियां रद्द किए जाने के बाद क्षेत्र में दोबारा युद्ध छिड़ने की आशंकाएं गहरी हो गई हैं।











