दोहा: कतर की राजधानी दोहा में जारी शांति वार्ता के बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में स्थित मिसाइल ठिकानों और समुद्र में माइन बिछाने की कोशिश कर रही ईरानी नौकाओं को निशाना बनाते हुए नए हवाई हमले किए हैं। इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने ८ अप्रैल से लागू कमजोर युद्धविराम को और अधिक संकट में डाल दिया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए इन्हें “आत्मरक्षा की कार्रवाई” बताया है। सेंटकॉम के अनुसार, यह कदम क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था।
बंदर अब्बास और होर्मुज जलडमरूमध्य बना मुख्य निशाना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों का मुख्य केंद्र बंदर अब्बास के आसपास का इलाका रहा। यह क्षेत्र ईरान का एक बेहद महत्वपूर्ण नौसैनिक और सामरिक केंद्र है, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल आपूर्ति मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पास स्थित है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि क्षेत्र में कई जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया।
दोहा में वार्ता जारी, पर समझौता अभी दूर
यह सैन्य टकराव ऐसे समय में हुआ है जब दोहा में दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत चल रही है। इस शांति वार्ता में ईरान का एक शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल शामिल है, जिसमें:
संसद प्रमुख मोहम्मद बाकर गालिबाफ
विदेश मंत्री अब्बास अराघची
ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर शामिल हैं।
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, हालांकि बातचीत में कुछ आंशिक प्रगति जरूर हुई है, लेकिन मौजूदा तनाव को देखते हुए किसी ठोस और अंतिम समझौते की संभावना अभी दूर नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, बातचीत की मेज पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, ईरान की परमाणु सामग्री पर नियंत्रण और विदेशों में जमे ईरानी फंड्स को जारी करने जैसे बेहद जटिल मुद्दे शामिल हैं।
ट्रंप की सख्त मांग और ईरान का कड़ा रुख
इस नाजुक मोड़ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक नए बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ी शर्त रखते हुए मांग की है कि:
”ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को या तो पूरी तरह से अमेरिका को सौंप दे या फिर उसे अंतरराष्ट्रीय निगरानी में पूरी तरह नष्ट करे।”
ट्रंप के इस रुख से साफ है कि वाशिंगटन परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर कोई ढील देने के मूड में नहीं है।
दूसरी तरफ, ईरान ने भी झुकने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के नए प्रमुख मोहम्मद बाकर जोलगदर ने अमेरिका और इजरायल को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट किया कि इस लड़ाई में “पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता।” उन्होंने इसे ईरान की मजबूत प्रतिरोध क्षमता का प्रतीक बताया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा
सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि एक तरफ कूटनीतिक बातचीत और दूसरी तरफ सीधे सैन्य हमले दर्शाते हैं कि खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद विस्फोटक बने हुए हैं। यदि दोहा वार्ता किसी तार्किक नतीजे पर पहुंचे बिना विफल होती है, तो इसका सीधा और गंभीर असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ना तय है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें दोहा के कूटनीतिक गलियारों और खाड़ी की समुद्री सीमाओं पर टिकी हैं।










