मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा: घबराएं नहीं माता-बहनें
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की पिछली सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ की सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां और अनियमितताएं सामने आने के बाद अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में पता चला है कि महिलाओं को मिलने वाली इस योजना का लाभ कई पुरुष उठा रहे थे, जिसके कारण सूची से करीब ३० लाख फर्जी नाम हटाए जाएंगे। इसी अनियमितता को देखते हुए सरकार ने इस बार हर आवेदन पत्र और दस्तावेज की बेहद सावधानी से जांच (स्क्रूटनी) करने का फैसला लिया है, जिसके बाद ही लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। हालांकि, सरकार के इस सख्त रुख और लगभग १२ पन्नों के लंबे आवेदन पत्र को लेकर आम लोगों के बीच चिंता और सवाल बढ़ रहे हैं।
इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए महिला, बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि इस फॉर्म में ऐसी कोई भी गोपनीय या जटिल जानकारी नहीं मांगी गई है जिससे लोगों को परेशानी हो। पहले सरकार का विचार लक्ष्मी भंडार योजना को ही नई ‘अन्नपूर्णा योजना’ में स्थानांतरित करने का था, लेकिन पिछली योजना में भारी फर्जीवाड़ा मिलने के कारण यह विस्तृत फॉर्म लाना जरूरी हो गया। उन्होंने महिलाओं से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि फॉर्म भरने के लिए पूरे ९० दिनों का पर्याप्त समय है, इसलिए किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें। मां-बहनों की मदद के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे और वे डीएम ऑफिस, कॉरपोरेशन ऑफिस, वार्ड या बोरो ऑफिस जाकर भी सहायता ले सकती हैं। मंत्री ने साफ किया कि जो लोग सही तथ्य देंगे, उनका फॉर्म खारिज होने का कोई सवाल ही नहीं उठता, हालांकि जो लोग इनकम टैक्स (आयकर) देते हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
दूसरी ओर, इस कड़ी जांच के पीछे का एक और बड़ा कारण बताते हुए मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि यह सख्त स्क्रूटनी इसलिए की जा रही है ताकि कोई भी बांग्लादेशी इस सरकारी योजना का गलत लाभ न उठा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पूरी जांच-पड़ताल के किसी को भी सरकारी खजाने से लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आम जनता को आश्वस्त करते हुए यह भी कहा कि भविष्य में अन्नपूर्णा योजना के इस फॉर्म को और अधिक सरल और सुगम बनाया जाएगा ताकि लोगों को इसे भरने में और आसानी हो।










