तवांग (अरुणाचल प्रदेश): सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेमसिंह तामांग ने उत्तर-पूर्वी भारत को एकीकृत और विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए सभी आठ राज्यों के बीच सामूहिक सहयोग पर जोर दिया है।
अरुणाचल प्रदेश के तवांग में गुरुवार से शुरू हुए १४वें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (आईटीएम) २०२६ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री तामांग ने सतत पर्यटन, सुदृढ़ परिवहन नेटवर्क, सांस्कृतिक संरक्षण और समावेशी आर्थिक विकास पर जोर दिया।
संबोधन के दौरान उन्होंने सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के बीच साझा हिमालयी सभ्यता, समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा तथा प्राकृतिक सुंदरता की चर्चा की। मुख्यमंत्री तामांग ने कहा, “उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को उजागर करने के लिए आठों राज्यों को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है।”
उन्होंने बताया कि सिक्किम में संचालित ‘मेगा होमस्टे योजना’, ओझल में पड़े (अप्रत्यक्ष) पर्यटन स्थलों के संवर्धन तथा स्थानीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करने हेतु बुनियादी ढांचे के विकास पर सरकार जोर देती आ रही है। पर्यटन और आर्थिक समृद्धि के लिए सुगम पहुंच को प्राथमिक शर्त बताते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग-१० को सभी मौसमों में निरंतर संचालित होने वाले (ऑल-वेदर) राजमार्ग के रूप में स्तरोन्नत करने की अपरिहार्यता पर बल दिया।
इस अवसर पर उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय तथा अरुणाचल प्रदेश सरकार के प्रति निमंत्रण और गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के मार्गदर्शन में अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट कातिक १३ से १५ गते तक (२९ से ३१ अक्टूबर) चलेगा।
उक्त कार्यक्रम में सिक्किम के पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री छिरिंग टी. भूटिया, अध्यक्ष सोनम नोर्गे लाचुंगपा, सचिव होंडला ग्यालत्सेन, सह-निदेशक लामिन थिंग, उप-निदेशक यामिनी प्रधान तथा छिरिंग ओंगमु भूटिया सहित उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की सहभागिता रही। इसी प्रकार, टास, आस्था और समिट ग्रुप ऑफ होटल्स जैसे सिक्किम के पर्यटन व्यवसायियों तथा हितधारक संस्थाओं की भी सक्रिय उपस्थिति रही।





