संयुक्त जन अधिकार मोर्चा की ‘लोक समाध यात्रा’ झापा से शुरू, हुलाकी मार्ग होते हुए कंचनपुर तक जाएगी

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देवेन्द्र के. ढुंगाना

झापा: दमित जनता की दबी हुई आवाज को बुलंद करने और बिखरे हुए आंदोलनों को एकजुट करने के उद्देश्य से संयुक्त जन अधिकार मोर्चा, नेपाल केंद्रीय समिति के आयोजन में ‘लोक समाध यात्रा’ – जनसंदेश यात्रा आज रविवार से झापा से शुरू हुई है।
झापा जिले के गौरादह नगरपालिका स्थित जुरोपानी बाजार में आम सभा कर यात्रा का शुभारंभ किया गया। इससे पहले गौरादह नगरपालिका-८ पुलचौक स्थित शिवालय मंदिर प्रांगण से २५१ घंटे की पैदल यात्रा के रूप में परिकल्पित इस अभियान को केंद्रीय समिति के नेतृत्व में २४ दिवसीय ‘लोक समाध यात्रा’ के रूप में आगे बढ़ाया गया है। २४ दिनों तक चलने वाली यह यात्रा हुलाकी राजमार्ग होते हुए 24 जिलों को पार कर महाकाली के कंचनपुर तक पहुंचेगी।
यात्रा में मोर्चा के अंतर्गत 4 मुख्य जनसंगठनों की भागीदारी है

१. मीटरब्याज के खिलाफ किसान मजदूर आंदोलन, नेपाल

२. लघुवित्त तथा वित्तीय शोषण के विरुद्ध किसान-मजदूर आंदोलन, नेपाल

३. भूमि अधिकार आंदोलन, नेपाल

४. पीपुल्स फोर्स, नेपाल


कार्यक्रम में आंदोलन नेपाल झापा जिला अध्यक्ष मानबहादुर लिम्बू की अध्यक्षता, लघुवित्त तथा वित्तीय शोषण के विरुद्ध संघर्ष समूह झापा अध्यक्ष देवीप्रसाद भंडारी सहित की उपस्थिति थी। केंद्रीय स्तर से आंदोलन नेपाल के केंद्रीय अध्यक्ष निर्गुणराज जैसी, केंद्रीय संरक्षक शिव तिवारी, केंद्रीय इंचार्ज सुरेश सिम्खडा, केंद्रीय महासचिव हेमराज दाहाल सहित नेताओं की सहभागिता रही।
लोक समाध यात्रा क्या है?
आयोजकों के अनुसार ‘लोक समाध यात्रा’ उत्पीड़ित जनता की दबी हुई आवाज, ओझल में पड़े मुद्दे, अधूरी मांगों और न्याय के लिए हो रहे संघर्षों को जनस्तर तक जाकर समझने, समझाने और परिवर्तन के लिए साझा पहल बनाने की संवाद यात्रा है।
किसान, मजदूर, भूमिहीन, सुकुम्बासी, मीटरब्याज, वित्तीय शोषण, पर्यावरण संकट, पहचान आंदोलन, महिला, दलित, युवा तथा हाशिए के समुदायों की वास्तविक समस्याओं और मांगों को साझा सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे के रूप में स्थापित करना इसका केंद्रीय उद्देश्य है।
यात्रा का उद्देश्य और मर्म
इस यात्रा ने जनता की वास्तविक समस्याओं, उनके सामाजिक-आर्थिक कारणों और मौजूदा संरचनागत जटिलताओं की पहचान कर राज्यसत्ता द्वारा हल न की गई या हल न करने चाही गई समस्याओं की वास्तविकता को उजागर करने का लक्ष्य लिया है।
यह विभिन्न आंदोलनों के बीच आपसी विश्वास, सहयोग और संगठनात्मक एकता विकसित कर जनता के नेतृत्व और भागीदारी को बढ़ाने तथा राज्यसत्ता को जनता की मांगों के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए जनदबाव बनाने का लक्ष्य रखती है। मोर्चा के अनुसार ‘मुद्दा समझना, समझाना और बदलना’ की प्रक्रिया के माध्यम से उत्पीड़ित जनता के आंदोलनों को एकजुट कर संगठित प्रतिरोध संघर्ष को आगे बढ़ाना इसकी मूल प्रतिबद्धता है। बिखरे हुए मुद्दों को साझा आंदोलन और आंदोलन को संगठित प्रतिरोध से जोड़ना ही इसका मूल मर्म है।
यात्रा के प्रमुख कार्यक्रम
क) जनसंगठनों की संयुक्त बैठक के माध्यम से साझा मुद्दों, अनुभवों और कार्यदिशा पर चर्चा तथा समन्वय करना।
ख) मीटरब्याज, लघुवित्तीय शोषण, भूमि अधिकार, सुकुम्बासी समस्या तथा अन्य सामाजिक न्याय के आंदोलनों से संवाद कर सहयोग की संभावनाएं तलाशना।
ग) लेखक, पत्रकार, बुद्धिजीवी और राजनीतिक नेतृत्व से संवाद कर जनता के मुद्दों को सार्वजनिक बहस में लाना।
घ) समकालीन आंदोलनों तथा नागरिक अधिकार अभियानों से संवाद कर एकता और सामूहिक संघर्ष की नींव रखना।
उत्पीड़ित जनता की आवाज को बुलंद करने के लिए आयोजित यात्रा में भाग लेने के लिए किसान, मजदूर, भूमिहीन, सुकुम्बासी, युवा, महिला, दलित, बुद्धिजीवी, अधिकारकर्मी तथा संपूर्ण न्यायप्रिय जनसमुदाय से मोर्चा ने हार्दिक अपील की है। साथ ही मौजूदा राज्यसत्ता द्वारा हल न किए गए वर्गीय न्याय के सभी मुद्दों का स्थायी समाधान खोजने के लिए मोर्चा निरंतर आंदोलन में रहने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त करता है।

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