नई दिल्ली: ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने विश्व अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। तीनों नेताओं ने सुरक्षित व्यापार मार्गों, आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता तथा स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में वैकल्पिक संरचना की जरूरत बताई।
डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती देने की ब्रिक्स की कोशिशों की अमेरिका द्वारा आलोचना किए जाने के बीच नेताओं के ये बयान सामने आए हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी प्रभाव के विकल्प के निर्माण की ब्रिक्स की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा और स्पष्ट होती दिखाई दे रही है।
सुरक्षित समुद्री मार्ग और आपूर्ति श्रृंखला पर जोर
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार की निरंतरता के लिए सुरक्षित समुद्री मार्गों और निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत नौवहन की स्वतंत्रता तथा समुद्र में यात्रा करने वाले नाविकों की सुरक्षा का दृढ़ समर्थक है।
अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध का जोखिम बढ़ने के बीच मोदी का यह बयान आया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों को सीधे प्रभावित कर सकती है।
मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यापार को गति देने के लिए समुद्री मार्ग सुरक्षित होने चाहिए, आपूर्ति मार्ग खुले रहने चाहिए और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
“वैश्विक व्यापार तभी आगे बढ़ सकता है जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, आपूर्ति मार्ग खुले रहें और नाविक सुरक्षित हों। यही कारण है कि भारत नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का दृढ़ समर्थक है।”: ब्रिक्स बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पुतिन का संकेत
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक और गहरे बदलाव हो रहे हैं। उनके अनुसार, उभरती अर्थव्यवस्थाएं धीरे-धीरे उन पारंपरिक आर्थिक शक्तियों का स्थान ले रही हैं, जिन्होंने बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में वैश्विक आर्थिक विकास का नेतृत्व किया था।
पुतिन ने स्वीकार किया कि स्थापित अर्थव्यवस्थाओं के पास अब भी मजबूत पक्ष हैं। विकसित बुनियादी ढांचा, उन्नत तकनीक और वैज्ञानिक क्षमताओं के कारण इन देशों का प्रभाव तत्काल समाप्त नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है।
ब्रिक्स नेताओं के इन बयानों से वैश्विक अर्थव्यवस्था में बहुध्रुवीय व्यवस्था की बहस को और बल मिला है। स्थानीय मुद्राओं में कारोबार का विस्तार, सुरक्षित व्यापारिक मार्गों का निर्माण और वैकल्पिक आर्थिक तंत्र का विकास प्राथमिकता बनता है तो पारंपरिक रूप से अमेरिकी डॉलर पर निर्भर वैश्विक व्यापार प्रणाली में धीरे-धीरे बदलाव आ सकता है।
इस तरह ब्रिक्स बिजनेस फोरम से मोदी, पुतिन और पेजेश्कियान ने आर्थिक सहयोग को केंद्र में रखते हुए वैश्विक व्यापार और वित्तीय व्यवस्था में नए विकल्पों की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका संदेश केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।





