नई दिल्ली: भारत और नेपाल ने स्थानीय भाषाओं को डिजिटल दुनिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जोड़ने के लिए मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाले डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी) की टीम ने काठमांडू विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई केंद्र की टीम के साथ इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत की। इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ भी बैठक हुई।
बातचीत में खास तौर पर नेपाल की स्थानीय भाषाओं के लिए एआई आधारित तकनीक विकसित करने पर जोर दिया गया। नेपाली के अलावा नेवारी, तमांग और गुरुंग जैसी भाषाओं को एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेहतर जगह देने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके साथ ही प्राचलित और रंजना जैसी पारंपरिक लिपियों को भी डिजिटल तकनीक से जोड़ने पर विचार किया गया। दोनों पक्षों का मानना है कि एआई के दौर में कम इस्तेमाल होने वाली भाषाओं को तकनीक से जोड़ना जरूरी है, ताकि इन भाषाओं के बोलने वालों को भी डिजिटल सेवाओं का पूरा लाभ मिल सके।
बैठक में भाषा से जुड़े आंकड़ों यानी लैंग्वेज डेटा को जुटाने और सुरक्षित रखने की जरूरत पर भी चर्चा हुई। अलग-अलग भाषाओं और बोलियों को बोलने वाले लोगों की आवाज और भाषा से जुड़े पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध होने पर ही बेहतर एआई मॉडल तैयार किए जा सकते हैं। इसी के साथ अनुवाद की सुविधा को बेहतर बनाने और भाषा मॉडल तैयार करने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता जुटाने पर भी बात हुई।
सहयोग का दायरा केवल एआई मॉडल तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों पक्षों ने ऐसी तकनीक विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की, जिनके जरिए लोग अपनी स्थानीय भाषा में आवाज के माध्यम से डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर सकें। यानी भविष्य में स्थानीय भाषाओं में बोलकर जानकारी हासिल करने, सेवाओं का इस्तेमाल करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।
काठमांडू विश्वविद्यालय का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई केंद्र इस दिशा में अनुसंधान और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध करा सकता है। वहीं, भारत का भाषिणी प्लेटफॉर्म पहले से ही बहुभाषी डिजिटल सेवाओं और भाषा एआई के क्षेत्र में काम कर रहा है। ऐसे में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग से नेपाल की स्थानीय भाषाओं के लिए नए एआई मॉडल और डिजिटल समाधान विकसित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
भारत का भाषिणी देश में एआई आधारित बहुभाषी डिजिटल समावेशन के लिए प्रमुख मंच है। यह ८०० से अधिक सरकारी वेबसाइटों को भाषा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के लिए टेक्नोलॉजी सहयोग प्रदान करता है। भारत-नेपाल की यह पहल भाषा, तकनीक और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को एक नया आयाम दे सकती है।





