३०० से अधिक सुरंग में फंसे; भारतीय एनडीआरएफ टीम सहित बचाव कार्य तेज
काठमांडू (नेत्र बिक्रम बिमली): नेपाल के रसुवा स्थित भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण अब तक ६६९ लोगों की मृत्यु होने की पुष्टि हुई है। बाढ़ में बहकर आए शव भारत से सटे जिलों सहित नेपाल के विभिन्न हिस्सों में मिलने के बाद भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में भी उच्च सतर्कता बरती जा रही है।
नेपाल पुलिस द्वारा शनिवार को जारी नवीनतम विवरण के अनुसार, बाढ़ के तेज बहाव में बहे शव विभिन्न जिलों में पहुंचे हैं। इनमें से भारत की सीमा से लगे चितवन में सबसे अधिक २४८ और नवलपरासी पूर्व में १५८ शव मिले हैं। इसी तरह नवलपरासी पश्चिम में ७५, गोरखा में ५४, धादिंग में ४९, नुवाकोट में ४१, तनहुं में ३१ और रसुवा में १३ लोगों के शव मिले हैं।
सुरंग के भीतर ३०० श्रमिकों के फंसे होने की आशंका, एनडीआरएफ और चीनी टीम तैनात
बाढ़ के कारण रसुवा और नुवाकोट की ११ जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। विभिन्न परियोजनाओं में कार्यरत कम से कम ८९८ लोग अभी भी लापता हैं। २१६ मेगावाट की अपर त्रिशूली-१ जलविद्युत परियोजना की सुरंग (टनल) के भीतर अभी भी लगभग ३०० श्रमिकों के फंसे होने का अनुमान है।
विशेषज्ञ टीम और जटिल बचाव उपकरणों की आवश्यकता को देखते हुए नेपाल सरकार ने भारत और चीन से तकनीकी सहायता मांगी थी। नेपाल की अपील के तुरंत बाद भारत से ११ सदस्यों की विशेष बचाव टीम (एनडीआरएफ/विशेषज्ञ) और चीन की विशेषज्ञ टीम काठमांडू होते हुए सीधे रसुवा के प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर सुरंग में फंसे लोगों के बचाव कार्य में जुट गई है।
नेपाल के परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, सुरंग के भीतर फंसे लोगों के बचाव, क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्संचालन, मृतकों की पहचान तथा डीएनए परीक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता मांगी गई है। भारतीय बचाव टीम आधुनिक उपकरणों के साथ जलविद्युत परियोजनाओं की जटिल सुरंगों में खोज अभियान चला रही है।
२,३७१ लोगों को सुरक्षित निकाला गया, सीमा क्षेत्रों में भी सतर्कता
नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र प्रहरी बल के ४,८५४ से अधिक सुरक्षाकर्मी बचाव कार्य में तैनात हैं। बचाव के दौरान २७ पुलिसकर्मी भी लापता हो गए हैं। अब तक २ हजार ३७१ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि १४० से अधिक घायलों का काठमांडू के अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
भोटेकोशी और त्रिशूली में फिर से बाढ़ का खतरा बढ़ने के कारण मुग्लिन होते हुए भारत की ओर बहने वाली नदियों के तटीय क्षेत्रों में भी अलर्ट जारी किया गया है। राहत और पुनर्निर्माण के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में ४ अरब ३८ करोड़ रुपये एकत्र हो चुके हैं, जबकि भारत सरकार ने अतिरिक्त तकनीकी और मानवीय सहायता प्रदान करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।





