काठमांडू: रसूवा के तिमुरे इलाके में बाढ़ की तबाही के बीच चलाए जा रहे राहत और बचाव कार्य के दौरान एक अद्भुत और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। बुधवार सुबह तिब्बत क्षेत्र से आई भीषण बाढ़ में लापता हुई एक ६ साल की बच्ची को ६० घंटे बाद शुक्रवार शाम जीवित बचा लिया गया।
सशस्त्र प्रहरी बल की टीम ने बच्ची को बॉर्डर आउटपोस्ट तिमुरे से लगभग २०० मीटर की दूरी पर बाढ़ द्वारा जमा किए गए पत्थरों, कीचड़ और लकड़ी के बड़े शहतीरों के मलबे के नीचे से सकुशल बाहर निकाला।
बुधवार सुबह तिब्बत की ओर से अचानक आई बाढ़ ने रसूवागढ़ी और तिमुरे क्षेत्र में व्यापक जान-माल का नुकसान पहुंचाया था। हादसे के बाद बचाव दल राहत कार्य में जुटे हुए थे, ऐसे में ६० घंटे बाद बच्ची का जीवित मिलना सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय लोगों के लिए किसी “बड़े चमत्कार” से कम नहीं है।
सशस्त्र प्रहरी बल के सह-प्रवक्ता और पुलिस उप-अधीक्षक (डीएसपी) शैलेंद्र थापा के अनुसार, बाढ़ के मलबे में फंसी बच्ची की हालत स्थिर है। डीएसपी थापा ने बताया, “बच्ची बाढ़ के बहाव में बहकर आए पत्थरों और लकड़ी के ढेर के बीच फंसी हुई पाई गई। बचाव के तुरंत बाद सुरक्षा बल की टीम ने उसे प्राथमिक उपचार दिया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।”
बचाई गई बच्ची के नाम और उसके परिवार की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। सुरक्षा एजेंसियां बच्ची के बेहतर इलाज के साथ-साथ उसके अभिभावकों की तलाश में जुटी हुई हैं।
फिलहाल रसूवा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नेपाल पुलिस, सशस्त्र प्रहरी बल और नेपाली सेना की टुकड़ियां खोज, बचाव और राहत सामग्री वितरण का काम तेजी से कर रही हैं। बाढ़ के कारण तिमुरे और रसूवागढ़ी क्षेत्रों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और नुकसान के अन्य विवरण जुटाए जा रहे हैं।





