सिलीगुड़ी में अदालत कर्मचारियों की ४८ घंटे लंबी हड़ताल शुरू

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सिलीगुड़ी: ​पश्चिम बंगाल के अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ सिलीगुड़ी में भी अदालत के कर्मचारी अपनी विभिन्न पेशेवर मांगों को लेकर ४८ घंटे लंबे विरोध प्रदर्शन में उतर आए हैं। वेस्ट बंगाल कोर्ट एम्प्लॉइज एसोसिएशन के साथ-साथ अन्य कर्मचारी संगठनों के आह्वान पर २४ और २५ अगस्त को यह अदालत बंद का आयोजन किया गया है। लंबे समय से लंबित मांगों के विषय में संबंधित अधिकारियों का बार-बार ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद कोई सकारात्मक पहल न होने पर कर्मचारी बाध्य होकर आंदोलन करने को मजबूर हुए हैं।
​दार्जिलिंग जिले में वर्ष २०१९ के बाद से अदालत के कर्मचारियों की नई भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ठप्प है। इस अवधि में कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, फिर भी खाली पदों पर नई नियुक्ति नहीं की गई है। फिलहाल जिले में स्वीकृत कुल १३५ पदों के मुकाबले केवल लगभग ५० कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इस तरह कर्मचारियों की भारी कमी के कारण मौजूदा सीमित कर्मचारियों पर काम का अत्यधिक दबाव बढ़ गया है, जिससे न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों को समय पर पूरा करने में भारी कठिनाई आ रही है।
​कर्मचारियों ने नई भर्ती के साथ-साथ समयबद्ध पदोन्नति देने और सर्विस रूल्स २०१५ में आवश्यक संशोधन करके संशोधित नियमों को जल्द से जल्द सार्वजनिक करने की पुरजोर मांग की है। इसके अलावा, वर्तमान समय में ई-कोर्ट्स, सीआईएस, सेंट्रल फाइलिंग और सर्वर संचालन जैसे तकनीकी कार्यों का दबाव काफी बढ़ गया है। तकनीकी कार्यों के लिए अलग से स्थायी पद सृजित न होने के कारण लिपिक और अन्य कर्मचारियों पर अतिरिक्त तकनीकी जिम्मेदारियों का बोझ पड़ रहा है। इसीलिए कर्मचारियों ने तकनीकी कार्यों के लिए अलग से स्थायी पद बनाने की मांग की है।
​इसी तरह, सिलीगुड़ी में नए अदालत भवन के निर्माण की मांग भी लंबे समय से अटकी हुई है, जिसे तुरंत मंजूरी देने और लंबे समय से फास्ट ट्रैक कोर्ट में कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी प्रदर्शनकारियों ने उठाई है। जिला स्तरीय अधिकारियों, कलकत्ता उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और अन्य संबंधित निकायों को लिखित आवेदन देने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो सोमवार से सिलीगुड़ी अदालत परिसर में शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया गया। कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि इस ४८ घंटे के विरोध कार्यक्रम के बाद राज्य समिति की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी और यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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