१९४५ की विमान दुर्घटना को मानने से समर्थकों का इनकार
नई दिल्ली: स्वतंत्रता संग्राम के महान नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ८१वीं पुण्यतिथि पर देश उन्हें नमन कर रहा है। हालांकि, उनकी मृत्यु से जुड़ा रहस्य आठ दशकों बाद भी बरकरार है। सरकारी और ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, १८ अगस्त १९४५ को ताइवान के ताइहोकू हवाई अड्डे के पास एक जापानी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें गंभीर रूप से जलने के कारण नेताजी का निधन होना माना जाता है। इसके बावजूद, देशवासियों और उनके समर्थकों का एक बड़ा वर्ग आज भी इस दावे को स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
नेताजी के अंतर्ध्यान होने और मृत्यु की सच्चाई सामने लाने के लिए समय-समय पर जांच कमेटियों का गठन किया गया। वर्ष १९५६ में गठित शाहनवाज खान समिति ने अपनी रिपोर्ट में माना कि १९४५ के विमान हादसे में ही नेताजी की मृत्यु हुई थी और उनकी अस्थियां टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में सुरक्षित रखी गई हैं, हालांकि समिति के सदस्य और नेताजी के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस ने इस निष्कर्ष से असहमति जताई थी। इसके बाद १९७० में बने खोसला आयोग ने भी विमान दुर्घटना की पुष्टि की। हालांकि, १९९९ में गठित मुखर्जी आयोग ने जांच के बाद विमान दुर्घटना की थ्योरी को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। जांच आयोगों की परस्पर विरोधी रिपोर्टों और गुमनामी बाबा जैसे दावों के कारण आज भी इस विषय पर संशय बना हुआ है।











