गंगटोक: सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग ने राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस २०२६ के ऐतिहासिक अवसर पर सिक्किम सहित देश भर के सभी मछली उत्पादकों, मछुआरों और इस क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री तामांग ने अपने विशेष संदेश में ग्रामीण आजीविका, खाद्य सुरक्षा और राज्य की आर्थिक समृद्धि में मछली किसानों के कठिन परिश्रम और अमूल्य योगदान की सराहना करते हुए उन्हें अर्थव्यवस्था का एक अनिवार्य स्तंभ बताया है।
सिक्किम सरकार द्वारा जारी आधिकारिक संदेश के अनुसार, राज्य सरकार प्रत्येक मछली किसान के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने दृढ़ता से कहा है कि आत्मनिर्भर मत्स्य पालन क्षेत्र ही ‘आत्मनिर्भर सिक्किम’ के व्यापक दृष्टिकोण का एक अभिन्न हिस्सा है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने और मत्स्य पालन के क्षेत्र में उद्यमिता के लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। हाल ही में सिलीगुड़ी में पहली बार आयोजित हुए सफल ‘सिक्किम मछली महोत्सव’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने किसानों को सिक्किम की प्रीमियम रेनबो ट्राउट, स्थानीय प्रजातियों की मछलियों और मूल्य वर्धित उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक बेहतरीन मंच प्रदान किया है, जिससे बाजार विस्तार के नए रास्ते खुले हैं।
राज्य में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (पीएमएमएसवाई) और राज्य की अपनी ‘मुख्यमंत्री मत्स्य उत्पादन योजना’ (एमएमएमयुवाई) के तहत कई आधुनिक कार्य किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) और बायोफ्लॉक जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से उत्पादन का आधुनिकीकरण करने, उच्च गुणवत्ता वाले मछली के बीज सुनिश्चित करने, बाजार लिंकेज को मजबूत करने और मूल्य संवर्धन को सहायता प्रदान करने के लिए लगातार निवेश किया जा रहा है। इन दूरगामी पहलों का मुख्य उद्देश्य मछली किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए राज्य की समृद्ध जलीय जैव विविधता को सुरक्षित रखना है।
राष्ट्रीय मत्स्य पालन दिवस के इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री तामांग ने किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और संबंधित संस्थानों से नए नवाचारों को अपनाने का आह्वान किया है। उन्होंने राज्य के युवाओं को मत्स्य पालन को एक व्यावहारिक और सम्मानित पेशे के रूप में देखने के लिए प्रेरित करते हुए एक लचीला और आत्मनिर्भर मत्स्य क्षेत्र बनाने के लिए नए उत्साह के साथ काम करने की अपील की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सिक्किम का मत्स्य पालन क्षेत्र आने वाले समय में सतत और आत्मनिर्भर विकास के एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरेगा, जो ‘विकसित सिक्किम’ और ‘विकसित भारत २०४७’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को साकार करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा।










