कोलकाता: पश्चिम बंगाल के आर्थिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए पर्यटन क्षेत्र को मुख्य चालक शक्ति के रूप में विकसित किया जाएगा। पश्चिम बंगाल सरकार के माननीय पर्यटन मंत्री की अध्यक्षता में हाल ही में संपन्न एक उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक में राज्य की समृद्ध ‘क्रिएटिव इकोनॉमी’ (रचनात्मक अर्थव्यवस्था) को पर्यटन से जोड़ने की एक व्यापक योजना पेश की गई है। डॉक्टर शंकर घोष के आधिकारिक फेसबुक पेज से प्राप्त विवरण के अनुसार, राज्य के पर्यटन विभाग और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के बीच इस विषय पर एक ऐतिहासिक सहयोग शुरू हुआ है।
बैठक में आईआईटी खड़गपुर के शैक्षणिक विशेषज्ञों डाॅ. पार्थ घोष, प्रो. जॉय सेन और डाॅ. श्रेयश बनिक ने एक विशेष कार्य योजना प्रस्तुत की। “हमारे राज्य में रचनात्मक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन का दायरा तथा आर्थिक-सांस्कृतिक गौरव का पुनरुत्थान” शीर्षक वाली इस प्रस्तुति में राज्य की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उपाय सुझाए गए हैं। बैठक में सतत पर्यटन विकास के लिए एक मजबूत और निवेश-अनुकूल नीतिगत ढांचा तैयार करने तथा पश्चिम बंगाल की अनूठी पहचान, त्योहारों और कला को वैश्विक मंच पर उत्कृष्ट रूप से ब्रांड करने की रणनीति पर गहन चर्चा हुई।
इसी तरह, पर्यटकों के अनुभव, सुरक्षा और सुविधाओं को केंद्र में रखकर बुनियादी ढांचे का विकास करने तथा स्थानीय समुदाय (माइक्रो), क्षेत्रीय प्रशासन (मेसो) और राज्य स्तर की समग्र योजना (मैक्रो) के माध्यम से सतत विकास सुनिश्चित करने की त्रिपक्षीय योजना पर बल दिया गया। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम बंगाल की भौगोलिक विविधता का लाभ उठाते हुए पारंपरिक सांस्कृतिक पर्यटन के साथ-साथ नदी पर्यटन और साहसिक पर्यटन को रणनीतिक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। गंगा नदी के तट और हिमालयी क्षेत्र की अनूठी स्थिति को नए गंतव्यों के रूप में विकसित करते हुए, पश्चिम बंगाल को भारत के एक प्रमुख और आकर्षक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने में यह सहयोग एक मजबूत आधारशिला रखेगा।










