ग्रीष्म ऋतु के आगमन पर आम के फल से कुछ नवीन और अत्यंत स्वादिष्ट बनाने के लिए पके हुए आम तथा सूजी के सम्मिश्रण से एक उत्कृष्ट विशिष्ट मिष्ठान्न तैयार किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए सर्वप्रथम दो-तीन उत्तम पके हुए परंतु थोड़े कठोर आमों को स्वच्छ जल से धोकर और छीलकर स्थूल छिद्र वाले कद्दूकस से कसकर डेढ़ कप आम के लच्छे तैयार कर लिए जाते हैं। इसके पश्चात एक कढ़ाई में अल्प मात्रा में घृत (घी) गर्म करके आधा कप सूक्ष्म सूजी को मंद आंच पर तीन से चार मिनट तक हल्का भून लिया जाता है। सूजी भूनने के उपरांत इसमें आधा चम्मच मक्के का स्टार्च, दो चम्मच दुग्ध चूर्ण और सुगन्ध के लिए थोड़ी इलायची का चूर्ण मिलाया जाता है, जो इस मिष्ठान्न को मावे के बिना भी पूर्णतः क्षीरयुक्त और विशिष्ट स्वाद प्रदान करता है।
अब इसी सूजी वाले मिश्रण में कसा हुआ डेढ़ कप आम का लच्छा डालकर मंद आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक कि यह सिमटकर एक सिक्त पिंड (आटे की लोई) का रूप न ले ले, फिर इसे घृत युक्त थाली में निकालकर पांच मिनट के लिए ढक दिया जाता है। दूसरी ओर शर्करा की चाशनी तैयार करने के लिए आधा कप चीनी और एक कप जल को उबालकर, उसमें इलायची और इच्छानुसार खाद्य रंग मिलाकर गुलाब जामुन की भांति केवल एक चिपचिपा घोल बनाया जाता है, इसे गाढ़ा नहीं किया जाता। अंत में आम के पिंड पका हुआ आम हल्का गुनगुना होने पर उसे हाथों से मसलकर चिकना कर लिया जाता है और लघु गोलाकार पिंड बनाकर मध्यम गर्म घृत या तेल में सुवर्ण-श्याम (गोल्डन ब्राउन) होने तक तला जाता है। इन तले हुए गोलों को तत्काल गरम चाशनी में डाल दिया जाता है और एक घंटे पश्चात जब ये चाशनी सोखकर स्पंजी हो जाते हैं, तो स्वादिष्ट ‘मैंगो रसभरी’ मिष्ठान्न तैयार हो जाता है।










