रूस द्वारा ड्रोन रोधी विशेष कारतूस विकसित

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एके सीरीज राइफलों से हो सकेगा इस्तेमाल, क्षमता ढाई गुना बढ़ने का दावा

​नयी दिल्ली: रूस की सरकारी डिफेंस कंपनी रोस्टेक ने एके सीरीज की राइफलों के लिए ‘म्नोगोटोचिये’ नाम का एक नया कारतूस विकसित किया है। कंपनी का दावा है कि यह कारतूस छोटे ड्रोन (यूएभी) को निशाना बनाने की क्षमता को पहले के मुकाबले ढाई गुना तक बढ़ा सकता है। मौजूदा एके राइफलों में इस्तेमाल की जा सकने वाली यह नई गोली लगभग ३०० मीटर की दूरी तक छोटे ड्रोन के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी बताई जा रही है।
​रोस्टेक के अनुसार ‘म्नोगोटोचिये’ कारतूस की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशेष डिजाइन है। यह गोली राइफल के बैरल से बाहर निकलने के बाद तीन अलग-अलग प्रोजेक्टाइल (टुकड़ों) में बंट जाती है, जिससे इसका फैलाव बढ़ जाता है और तेजी से उड़ रहे छोटे ड्रोन को निशाना बनाने की संभावना काफी अधिक हो जाती है। इस कारतूस को इस तरह तैयार किया गया है कि इसके लिए नई राइफल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह पहले से रूसी हथियारों में इस्तेमाल हो रहे ५.४५×३९ मिमी और ७.६२×५४ मिमी कारतूस केस का उपयोग करता है, जिससे सैनिक अपनी मौजूदा एके सीरीज की राइफलों से ही ड्रोन का मुकाबला कर सकेंगे।
​रूस-यूक्रेन युद्ध समेत कई वैश्विक संघर्षों में छोटे ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जहाँ निगरानी, हमला और विस्फोटक पहुंचाने जैसे मिशनों में इनका बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। इसी वजह से दुनिया के कई देश महंगे एयर डिफेंस सिस्टम के साथ-साथ ऐसे व्यावहारिक हथियार भी विकसित कर रहे हैं, जिनसे सामान्य सैनिक भी ड्रोन का सामना कर सकें। फिलहाल रोस्टेक ने इस कारतूस की क्षमता को लेकर दावा किया है, जिसकी अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद यह साफ है कि बढ़ते ड्रोन खतरे को देखते हुए पारंपरिक हथियारों को आधुनिक तकनीक से लैस करने की कोशिशें तेज हो रही हैं।

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