​भारतीय सेना के रूसी हथियारों की टोह लेने बेलारूस पहुंचे पाकिस्तानी एयरफोर्स चीफ

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​मिन्स्क(बेलारूस): पाकिस्तानी वायुसेना के प्रमुख (सीएएफ) जहीर अहमद बाबर सिद्धू बेलारूस के आधिकारिक दौरे पर राजधानी मिन्स्क पहुंचे हैं। हालिया सैन्य टकराव (ऑपरेशन सिंदूर) में भारतीय सेना के रूसी निर्मित ‘एस-४०० एयर डिफेंस सिस्टम’ और अत्याधुनिक ड्रोन हमलों से भारी नुकसान झेलने के बाद, पाकिस्तान ब्याकडोर (पिछले दरवाजे) से रूसी हथियारों की तकनीक और उनकी कमजोरियों का पता लगाने के लिए यह दौरा कर रहा है।
​बेलारूस रूस का सबसे भरोसेमंद और करीबी सहयोगी देश है, जिसके पास रूसी सैन्य तकनीक और हथियारों की सीधी पहुंच है। चूंकि रूस सीधे तौर पर पाकिस्तान को अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति नहीं करता, इसलिए पाकिस्तान बेलारूस को जरिया बनाकर रूसी सैन्य तकनीक, ड्रोन, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स और भारी हथियार हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
​इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच सैनिकों की ट्रेनिंग, तकनीक हस्तांतरण (ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी) और संयुक्त हथियार उत्पादन सहित वर्ष २०२५-२७ के रक्षा रोडमैप पर उच्च स्तरीय सैन्य बातचीत होगी। पाकिस्तान ने बेलारूस के पायलटों को पूरी ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव भी रखा है। पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि इस त्रिकोणीय (पाकिस्तान-बेलारूस-रूस) नजदीकी से यूरेशियाई सुरक्षा समीकरण को नया आकार मिलेगा और पश्चिमी हथियारों पर निर्भरता कम होगी।
​हालांकि, भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का मुख्य उद्देश्य भारत के पास मौजूद रूसी हथियारों की कार्यप्रणाली को समझना और उनकी काट (काउंटर रणनीति) तैयार करना है। भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर में दिखाए गए आक्रामक सैन्य कौशल और मजबूत रक्षा प्रणाली से परेशान होकर पाकिस्तान अब बेलारूस के जरिए अपना सैन्य संतुलन सुधारने की कोशिश में जुटा है।

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