नयी दिल्ली: बलूच अधिकारों के लिए संघर्षरत प्रमुख संगठन बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) ने एक आधिकारिक घोषणा में बताया है कि उनकी केंद्रीय नेता डॉ. महरंग बलोच को दूसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। समिति के मुताबिक यह नामांकन जनवरी २०२६ में ही तय हो गया था, लेकिन संगठनात्मक नीतियों के चलते उस समय इसे गुप्त रखा गया था। अब वैश्विक स्तर पर शांति, न्याय और मानवाधिकारों के लिए डॉ. महरंग के प्रयासों को मिल रही पहचान को देखते हुए संगठन ने इस जानकारी को सार्वजनिक करने का फैसला किया है। बीवाईसी का मानना है कि यह नामांकन बलूच अधिकार आंदोलन के शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक चरित्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित करता है। इसके साथ ही संगठन ने आरोप लगाया है कि डॉ. महरंग बलोच और उनके सहयोगियों के खिलाफ की जा रही तमाम कानूनी कार्रवाइयाँ पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा हैं, जिनका मकसद बलूच जनता की जायज आवाज को कुचलना है। समिति ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि बलूच नेतृत्व को प्रताड़ित किए जाने के बाद से पूरे बलूचिस्तान में लोगों को जबरन गायब करने, न्यायेतर हत्याओं और सैन्य अभियानों की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हुई है। बलूचिस्तान के इन बिगड़ते हालातों को देखते हुए बीवाईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और लोकतांत्रिक देशों से वहां की स्थिति पर तुरंत ध्यान देने की भावुक अपील की है।








