नई दिल्ली: रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एक मेधावी छात्र के रूप में उभरे पावेल डुरोभ आज दुनिया के सबसे चर्चित और रहस्यमयी टेक दिग्गजों में से एक हैं। तकनीक की दुनिया में उनकी पहचान रूस में ‘वीकॉन्टैक्टे’
बनाकर हुई, जो फेसबुक का एक शक्तिशाली रूसी विकल्प था। हालांकि, उनकी यह सफलता जल्द ही सरकारी दबाव और राजनीतिक टकराव में बदल गई। वर्ष २०१३ में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई एक गुप्त बैठक में उन्हें कड़ी फटकार और संभावित निर्वासन के संकेत मिले, जिसके बाद उन्होंने अपना वतन छोड़ना ही उचित समझा। आज वे दुबई में रहकर टेलीग्राम साम्राज्य का संचालन कर रहे हैं, लेकिन उनका जीवन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
’द पॉपुलिस्ट’ नामक किताब में डुरोभ के व्यक्तित्व के गहरे और विरोधाभासी पहलुओं को दर्शाया गया है। वे सार्वजनिक रूप से अभिव्यक्ति की आजादी के सबसे बड़े समर्थक होने का दावा करते हैं, लेकिन उनके अपने ऐप के भीतर कामकाज का तरीका एक तानाशाह जैसा है। टेलीग्राम में कोई भी निर्णय उनकी सहमति के बिना नहीं लिया जाता; वे पूरे सिस्टम को ‘वन-मैन-शो’ की तरह नियंत्रित करते हैं। उनकी यह सनक न केवल उनके बिजनेस मॉडल में दिखती है, बल्कि उनके निजी जीवन में भी झलकती है। वे ‘प्रोनेटलिज्म’ नामक विचारधारा के समर्थक हैं, जिसका मानना है कि सभ्यता को बचाने के लिए अधिक से अधिक बच्चे पैदा किए जाने चाहिए। इसी विश्वास के चलते वे दावा करते हैं कि स्पर्म डोनेशन के माध्यम से दुनिया के १२ देशों में उनके १०० से अधिक जैविक बच्चे हैं।
उनका जीवन हमेशा से विवादों और चुनौतियों से घिरा रहा है। फ्रांस में हाल ही में हुई उनकी गिरफ्तारी और तीन दिनों की जेल ने उनके मानस पटल पर गहरा असर छोड़ा है। उन्होंने इस अनुभव को अपने जीवन का सबसे खौफनाक दौर बताया है, जिसने पश्चिम के देशों और वहां की सरकारी प्रणालियों के प्रति उनकी नफरत को और अधिक तीव्र कर दिया है। सरकारें उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखती हैं जो सुरक्षा मानकों और बाल यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों को रोकने में नाकाम रहा है, जबकि डुरोभ खुद को एक ऐसे क्रांतिकारी के रूप में पेश करते हैं जो सत्ता को चुनौती देने की हिम्मत रखता है। वे किसी भी सरकारी संस्था या पारंपरिक प्रेस पर भरोसा नहीं करते और सीधे अपने करोड़ों यूजर्स से जुड़ना पसंद करते हैं। उनकी यह ‘अकेले चलने की नीति’ ही टेलीग्राम को आज एक ऐसी जगह बना चुकी है, जहाँ जितनी आजादी है, उतने ही पाइरेसी, स्कैम और अवैध गतिविधियों के गंभीर आरोप भी हैं।









