मणिपुर हिंसा से विकास कार्य प्रभावित, शांति बहाली में बाधा : मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह

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इम्फाल : मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने कहा है कि राज्य में जारी हिंसा और अशांति के कारण सरकार के विकास कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। इम्फाल पश्चिम जिले में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शांति स्थापना और जनजीवन को सामान्य बनाने में सरकार का अधिकांश समय और ऊर्जा खर्च हो रही है।
मुख्यमंत्री सिंह के अनुसार, पदभार संभालने के बाद से ही राज्य विभिन्न प्रकार के संघर्षों और अशांति का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान करना और विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखना है। उन्होंने कहा, “हम विकास योजनाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन हिंसा और तनाव के कारण हमारा अधिकांश ध्यान शांति स्थापित करने पर केंद्रित करना पड़ रहा है।”
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने जिरिबाम जिले का दौरा कर कुकी, मैतेई और पाइते समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। हालांकि, उसी दौरान बिष्णुपुर जिले के ट्रोङ्गलाओबी क्षेत्र में हुए बम विस्फोट में दो बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद राज्य में फिर से तनाव बढ़ गया। इस घटना के बाद लगभग एक महीने तक विरोध प्रदर्शन और अशांति जारी रही।
इसी प्रकार, उखरुल जिले की यात्रा के दौरान उन्होंने कुकी और तांगखुल नागा समुदाय के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी, लेकिन उसी दिन हुए एक हमले में दो तांगखुल नागरिकों की मौत हो गई।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ व्यक्ति और समूह राज्य में शांति बहाल नहीं होने देना चाहते। उनका कहना था कि सामान्य स्थिति लौटने पर उनके आर्थिक हित प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए वे अस्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने लोगों की स्वतंत्र आवाजाही में बाधा डालने वाले तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
3 मई २०२३ से शुरू हुई मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

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