भारत-रूस एसयू-५७ डील का बात से पाकिस्तानी लोग का सातोपुत्लो उड़ा: चीन का आगे जाके गिड़गिड़ाया, जिनपिंग से मांगा दखल

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान का मिलिट्री एक्सपर्ट लोग भारत को रूसी एसयू-५७ फाइटर जेट मिलने का डर से एकदम सहमा हुआ है। उन लोग को डर है कि अगर भारत को ये रूसी लड़ाकू विमान मिल गया, तो पाकिस्तान हवाई ताकत का मामला में और ज्यादा पीछे छूट जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान भी चीन से जे-३५ लड़ाकू विमान खरीद रहा है, जिसका डिलीवरी इस साल का लास्ट तक शुरू हो सकता है, लेकिन वो लड़ाकू विमान तो अभी सिर्फ कागजी शेर है और उसको कोई भी लड़ाई में आजमाया नहीं गया है। वहीं, रूस ने एसयू-५७ को दुनिया भर का कई जंग में टेस्ट किया है, जिसमें सीरिया और यूक्रेन का लड़ाई भी शामिल है।
​भारत को एसयू-५७ खरीदने से रोकने का चक्कर
हाल में ही एक पॉडकास्ट में ‘क्वा ग्रुप’ का कमेंटेटर बिलाल खान और अर्सलान खान ने सलाह दिया कि पाकिस्तान को इस होने वाला खरीद का खिलाफ में कड़ा कैंपेन चलाना चाहिए। इसके अलावा, उन लोग ने कहा कि पाकिस्तान को चीन से लॉबिंग करना चाहिए कि वो अपना आर्थिक ताकत का इस्तेमाल करके रूस को इन एडवांस जेट्स का डिलीवरी रोकने के लिए मजबूर करे। उन्होंने कहा कि चीन ग्लोबल सप्लाई चेन का बादशाह है। ऐसे में वो अपना पावर दिखा के रूस के लिए डिलीवरी बंद करवा सकता है, जिससे भारत को मिलने वाला एसयू-५७ का डिलीवरी टल जाए।
​पाकिस्तानी एक्सपर्ट लोग ने चीन से क्या मांगा?
उन्होंने कहा कि चीन ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ (दुर्लभ खनिज) के इंटरनेशनल मार्केट पर राज करता है। ये सब आधुनिक एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के लिए बहुत जरूरी कंपोनेंट है। ऐसे में चीन, रूस को भारत को हथियार देने से रोकने के लिए इन सामानों का सप्लाई रोकने का धमकी दे सकता है। उन लोग को चिंता है कि एसयू-५७ का आना इस इलाका में पाकिस्तान और चीन दोनों का रणनीतिक हित के लिए बड़ा चुनौती बन जाएगा।
​क्या चीन सच में रूस का एरोस्पेस सेक्टर कंट्रोल करता है?
देखा जाए तो एसयू-५७ एक बहुत सीक्रेट और घरेलू स्तर पर तैयार किया गया एसेट है, जिसको सुखोई डिजाइन ब्यूरो ने खुद बनाया है। दुनिया का सारा बड़ा मिलिट्री पावर लोग का जैसा, रूस भी अपना खास रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खुद का सुरक्षित और नेशनल सप्लाई चेन पर भरोसा करता है। भले ही चीन ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ का दुनिया का सबसे बड़ा प्रोसेसर है, लेकिन इस कमर्शियल दबदबा का मतलब ये एकदम नहीं है कि उसको विदेशी, सरकारी मिलिट्री प्रोजेक्ट्स पर वीटो पावर मिल जाए।
​रूस ने भारत को दिया सुखोई एसयू-५७ का ऑफर
सुखोई एसयू-५७ रूस का सबसे धांसू, पांचवीं पीढ़ी का ट्विन-इंजन स्टील्थ मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। इसमें स्टील्थ टेक्नोलॉजी लगा हुआ है, जिससे ये दुश्मन का रडार को आराम से चकमा दे सकता है। ये लड़ाकू विमान सुपरसोनिक स्पीड से उड़ सकता है। हाल ही में, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को इस घातक लड़ाकू जेट को खरीदने और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ मिलकर भारत में ही इसको बनाने का ऑफर दिया है। रूस का दावा है कि ये बिना आफ्टरबर्नर का यूज किए भी लगातार सुपरसोनिक स्पीड से उड़ सकता है।

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