मंत्री दिलीप घोष ने उत्तर बंगाल की बैठक में कर्मचारियों की कमी और पंचायत प्रणाली की समस्याओं पर जताई चिंता

FB_IMG_1781286666231

११,००० पदों पर होगी भर्ती

सिलीगुड़ी: राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने उत्तर बंगाल की पंचायत व्यवस्था में आ रही विभिन्न समस्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सिलीगुड़ी के मैनाक टूरिस्ट लॉज में शुक्रवार को आयोजित एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री दिलीप घोष ने इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तर बंगाल के पांच जिलों—दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलीपुरद्वार के प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। इसके साथ ही दार्जिलिंग के विधायक नोमान राई और खरसांग के विधायक सोनाम लामा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
​बैठक के दौरान पंचायत विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा गरमाया रहा। मंत्री ने इस बात पर विशेष ध्यान आकर्षित किया कि कई ब्लॉकों में तो एक भी इंजीनियर उपलब्ध नहीं है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली के तहत पूरे राज्य में ११,००० कर्मचारियों की भर्ती करने का एक बड़ा निर्णय लिया गया है।
​इसके साथ ही बैठक में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं पर भी चर्चा की गई। मंत्री ने बताया कि वर्ष २०२३ से २०२६ तक का बकाया फंड और १५वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से १,७०० करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसका एक हिस्सा १०० दिनों की कार्य योजना (मनरेगा) सहित अन्य विकास कार्यों में उपयोग किया जाएगा।
​चाय बागान क्षेत्रों में जमीन का पट्टा (लैंड पट्टा) न होने के कारण आवास योजना के क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों और मकानों के आवंटन में हो रही देरी पर भी बातचीत हुई, ताकि इसका कोई उचित समाधान निकाला जा सके। मंत्री दिलीप घोष ने पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी के कारण सेवाओं में आ रही बाधाओं को भी स्वीकार किया। इसके साथ ही, उन्होंने गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) के कामकाज के तौर-तरीकों को लेकर अपनी असंतुष्टि भी प्रकट की।

About Author

Advertisement