होर्मुज नाकेबंदी के बीच सऊदी और तुर्की में ऐतिहासिक हेजाज रेलवे समझौता

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रियाद: क्षेत्रीय सहयोग और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए तुर्की और सऊदी अरब ने एक ऐतिहासिक ‘हेजाज रेलवे’ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। मिडिल ईस्ट के लिए इस रेलवे प्रोजेक्ट को एक बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है। इस समझौते के साथ ही सऊदी अरब इस ऐतिहासिक रेलवे नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया में शामिल होने वाला सबसे नया देश बन गया है। यह महत्वाकांक्षी रेल नेटवर्क तुर्की, सीरिया, जॉर्डन और सऊदी अरब को आपस में जोड़ते हुए खाड़ी देश ओमान और हिंद महासागर तक सीधा जमीनी मार्ग तैयार करेगा।
​तुर्की के परिवहन मंत्री अब्दुलकादिर उरालोलु ने रियाद में आयोजित आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह के दौरान कहा कि इस संवेदनशील समय में व्यापार और लॉजिस्टिक्स चेन का बिना किसी रुकावट के चलना बेहद जरूरी है। इस आधुनिक रेल लाइन का मुख्य उद्देश्य भूमध्य सागर और खाड़ी बाजारों के बीच एक मजबूत जमीनी मार्ग तैयार करना है, जिससे स्वेज नहर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री रास्तों पर निर्भरता को काफी कम किया जा सके। तुर्की से शुरू होकर इराक होते हुए सऊदी अरब तक जाने वाले दो ट्रायल रन ने इस रूट की व्यावहारिकता को पहले ही साबित कर दिया है।
​इस हेजाज रेलवे का इतिहास करीब १२५ साल पुराना है, जिसकी शुरुआत साल १९०० में ऑटोमन साम्राज्य के सुल्तान अब्दुल हामिद द्वितीय ने की थी। साल १९०८ में पहली बार चालू हुई इस रेल लाइन का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम तीर्थयात्रीयों के लिए मक्का-मदीना की यात्रा को आसान बनाना था, जिसने ४० दिन के सफर को घटाकर केवल ५ दिन का कर दिया था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारी नुकसान पहुंचने के बाद बंद हुए इस १९०० किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क को अब एक आधुनिक और सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय ट्रेड कॉरिडोर के रूप में ढाला जा रहा है।

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