बंगाल हार के बाद पहली बार दिल्ली में ममता, डीएमके ने दिखाया ठेंगा; इंडिया गठबंधन की बैठक में कौन-कौन होगा शामिल?

INDIA_Alliance_1780470007041_1780470013982_cce8a1d4-d751-4a5f-8e39-704474327bcf_1780836204677_6b6ceab2-0608-4e97-a007-e0114e2840c7

नई दिल्ली: ​देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व में आज होने वाली ‘इंडिया गठबंधन’ की बैठक को लेकर दिल्ली की सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। कांग्रेस नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर केंद्र की मोदी सरकार को ऊर्जा आपूर्ति संकट, एलपीजी सिलेंडर के बढ़ते दामों, सीबीएसई विवाद और नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी जैसे ज्वलन्त मुद्दों पर घेरने की रणनीति तैयार कर रही है, जिसके साथ ही साल २०२९ के आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने पर भी मंथन किया जाएगा। हालांकि इस अहम बैठक से ठीक पहले विपक्ष को एक बड़ा झटका लगा है क्योंकि तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके ने इस बैठक से दूरी बना ली है और इसमें शामिल न होने का फैसला किया है। वहीं दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पहली बार दिल्ली में आयोजित इस बैठक में हिस्सा लेने पहुंच रही हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता बढ़ गई है।
​इस महत्वपूर्ण बैठक को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल का कहना है कि यह बैठक देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी पर चर्चा करने के लिए बेहद जरूरी है, जिसमें छात्रों के मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। उधर कांग्रेस नेता उदित राज ने डीएमके के न आने पर कहा कि वे आएं तो अच्छा है, वरना लोकतंत्र बचाने की उनकी लड़ाई जारी रहेगी क्योंकि किसी को जबरन नहीं बुलाया जा सकता, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कोई इस समय न्यूट्रल रहता है तो वह परोक्ष रूप से भाजपा की ही मदद कर रहा है। इसी बीच आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ घंटों पहले ही एलपीजी सिलेंडर के दाम २९ रुपये बढ़े हैं, जिसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ा है, इसलिए विपक्ष का इन राष्ट्रीय मुद्दों पर चिंता करना स्वाभाविक है। इसके पलटवार में भाजपा नेता रेखा शर्मा और मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि ‘इंडी गठबंधन’ अब पूरी तरह समाप्ति की ओर है और जहां कांग्रेस होती है वहां कोई गठबंधन नहीं चल सकता क्योंकि सभी क्षेत्रीय दल कभी न कभी कांग्रेस से खफा होकर ही बने थे, इसलिए डीएमके और अन्य दलों का किनारा करना यह साफ दिखाता है कि इस बैठक का देश की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। फिलहाल इस बैठक में कुल २३ दलों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जहां सभी की निगाहें विशेष रूप से ममता बनर्जी के रुख पर टिकी रहेंगी।

About Author

Advertisement