नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में वैश्विक समाचार एजेंसियों के पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारत के साथ रूस के रिश्तों को बेहद खास और एक विशेष रणनीतिक साझेदारी बताया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका या पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर बनाया जा रहा दबाव पूरी तरह से व्यर्थ है और इससे दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की दिशा को नहीं बदला जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए पुतिन ने कहा कि मोदी जैसे नेता पर किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदेह है। भारत एक संप्रभु और बड़ा लोकतंत्र है, जो हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप ही फैसले लेता है, इसलिए यूक्रेन संकट के बाद भी भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखा।
आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को जल्द ही १०० अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और फार्मास्युटिकल (दवा उद्योग) के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण और दिलचस्प दीर्घकालिक परियोजनाओं पर काम चल रहा है। रक्षा सहयोग के मामले में भी रूस और भारत की साझेदारी बेहद मजबूत है। पुतिन ने भारत के साथ ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल जैसी उन्नत हथियार प्रणालियों के सफल सह-उत्पादन का जिक्र किया और साथ ही भारत को अत्याधुनिक सुखोई-५७ फाइटर जेट तकनीक पर मिलकर काम करने तथा उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति का प्रस्ताव भी दोहराया।
भारत के पड़ोसी देशों के संदर्भ में बात करते हुए पुतिन ने कहा कि वे भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों की जटिलताओं को अच्छी तरह समझते हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि पाकिस्तान पूरी तरह से चीन के नियंत्रण में है। पाकिस्तान एक बड़ा देश है और उसके अन्य देशों के साथ अपने बहुआयामी संबंध हैं। भारत और चीन के बीच के सीमा विवाद को उन्होंने बेहद संवेदनशील और बहुआयामी बताया और स्पष्ट किया कि इसमें किसी तीसरे देश का हस्तक्षेप ठीक नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के शीर्ष नेता आपसी हितों से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। गौरतलब है कि इसी वर्ष सितंबर महीने में नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स बैठक में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रपति पुतिन भारत का दौरा करने वाले हैं।











