- स्तालिन क्षेत्री
अगरतला: सीमापार अवैध घुसपैठ को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत के त्रिपुरा राज्य में पिछले चार वर्षों के दौरान ३,७०५ विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी एवं सुरक्षा प्रबंधों को और अधिक सुदृढ़ किए जाने के परिणामस्वरूप यह कार्रवाई संभव हो सकी है।
गृह विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष २०२२ से अब तक वैध यात्रा एवं निवास संबंधी दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश करने के आरोप में ३,७०५ विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में ३,४६३ बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं, जबकि अन्य में रोहिंग्या समुदाय के सदस्य तथा विभिन्न अफ्रीकी, यूरोपीय और एशियाई देशों के नागरिक शामिल हैं।
राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा तंत्र को समानांतर रूप से मजबूत करने की नीति अपनाई है। त्रिपुरा विधानसभा के हालिया बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बताया कि बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियों तथा भारत सरकार के गृह मंत्रालय (एमएचए) के निर्देशों के आधार पर राज्य के सभी आठ जिलों में विशेष कार्यबल (स्पेशल टास्क फोर्स-एसटीएफ) का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री साहा के अनुसार, एसटीएफ को अवैध सीमा पार गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ-साथ आतंकवाद, संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी तथा उग्रवादी नेटवर्क से संबंधित गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार फर्जी पहचान दस्तावेजों के उपयोग पर अंकुश लगाने तथा अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
त्रिपुरा की बांग्लादेश के साथ लगभग ८५६ किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। भौगोलिक स्थिति के कारण यह क्षेत्र अवैध आव्रजन एवं अन्य सीमापार गतिविधियों की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। सीमा के अधिकांश हिस्से में बाड़बंदी की जा चुकी है, किंतु दुर्गम भू-भाग एवं तकनीकी चुनौतियों के कारण लगभग 21 किलोमीटर क्षेत्र अब भी खुला हुआ है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वर्ष २०२४ के मध्य में बांग्लादेश में उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता के बाद सीमा क्षेत्रों में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। विशेष रूप से उसी वर्ष अगस्त में ढाका में हुए राजनीतिक परिवर्तन के बाद सुरक्षा उपायों को और अधिक कड़ा किया गया।
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अवैध घुसपैठ तथा अन्य सीमापार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए गश्त, निगरानी और तलाशी अभियानों का दायरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या निम्नानुसार है—
- वर्ष २०२२ : ९६५ व्यक्ति
- वर्ष २०२३ : १,०१४ व्यक्ति
- वर्ष २०२४ : ९४७ व्यक्ति
- वर्ष २०२५ (अब तक) : ५३७ व्यक्ति
गिरफ्तार किए गए अधिकांश विदेशी नागरिकों को आवश्यक कानूनी एवं राजनयिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उनके देशों को वापस भेज दिया गया है। हालांकि, वर्तमान में २२० विदेशी नागरिक त्रिपुरा की विभिन्न कारागारों में निरुद्ध हैं।
वर्ष २०२२ से अब तक गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में २२७ रोहिंग्या भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नाइजीरिया, कैमरून, गिनी, फ्रांस, पाकिस्तान सहित कई अन्य देशों के नागरिक भी गिरफ्तार किए गए हैं।
यह मामला न्यायपालिका का भी ध्यान आकर्षित कर चुका है। त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने हाल ही में राज्य सरकार को अवैध घुसपैठ रोकने के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए तीन माह के भीतर प्रतिवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश एम. एस. रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने तिपरा मोथा पार्टी के विधायक रंजीत देबबर्मा सहित तीन याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि गृह मंत्रालय द्वारा समय-समय पर जारी परामर्श और निर्देशों के बावजूद राज्य में अवैध आव्रजन की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए और अधिक सशक्त जमीनी कार्रवाई की आवश्यकता है।
न्यायालय के हस्तक्षेप का स्वागत करते हुए विधायक देबबर्मा ने कहा कि अवैध घुसपैठ राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है और यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इससे त्रिपुरा के आदिवासी समुदायों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने अन्य राज्यों की तर्ज पर व्यापक पहचान एवं निर्वासन अभियान चलाने की मांग की।
देबबर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि कुछ अवैध प्रवासियों ने भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से भारतीय सरकारी दस्तावेज प्राप्त कर लिए हैं। उनके अनुसार इनमें आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड, स्थायी निवास प्रमाणपत्र तथा स्वास्थ्य कार्ड शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी नागरिकों और स्थानीय निवासियों के बीच भाषाई, सांस्कृतिक एवं शारीरिक समानताएं होने के कारण अवैध प्रवासियों की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्य में लगभग 1 लाख 48 हजार अवैध मतदाता निवास कर रहे हो सकते हैं, हालांकि इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विधायक ने कहा कि वह इस मुद्दे को राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के समक्ष कई बार उठा चुके हैं और अवैध घुसपैठ तथा पहचान दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।यह संस्करण समाचार एजेंसी, दैनिक समाचारपत्र और सरकारी/नीतिगत रिपोर्टिंग की औपचारिक हिंदी शैली के अनुरूप तैयार किया गया है।











