धार्मिक आधार पर मिलने वाले सभी भत्ते बंद, सरकार शुरू करेगी ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक बेहद बड़ा और कड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने धार्मिक आधार पर दिए जाने वाले सभी वित्तीय सहायता भत्तों को इस महीने के बाद पूरी तरह से बंद करने का एलान किया है। राज्य के प्रशासनिक सचिवालय ‘नबान्न’ में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने मीडिया को यह जानकारी दी। सरकार के इस बड़े नीतिगत बदलाव के बाद राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
​अगले महीने से बंद होंगे इमामों और पुजारियों के भत्ते, स्कॉलरशिप जारी रहेगी
नगर विकास मंत्री के अनुसार, सूचना एवं संस्कृति विभाग और अल्पसंख्यक मामलों तथा मदरसा विभाग के तहत संचालित होने वाली धर्म आधारित सभी सहायता योजनाएं अगले महीने से रोक दी जाएंगी। इस फैसले के बाद राज्य में इमाम, मोअज्जेम और पुजारियों को मिलने वाला मासिक भत्ता बंद हो जाएगा। हालांकि, सरकार ने राहत देते हुए यह साफ किया है कि मदरसा और अल्पसंख्यक विभाग की स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) योजनाएं बंद नहीं की जा रही हैं और छात्रों को मिलने वाली आर्थिक मदद पहले की तरह ही जारी रहेगी।
​’लक्ष्मीर भंडार’ की जगह ‘अन्नपूर्णा भंडार’, सीएए आवेदकों को भी मिलेगा फायदा
धार्मिक भत्तों को बंद करने के बदले अब राज्य सरकार एक नई योजना “अन्नपूर्णा भंडार योजना” शुरू करने जा रही है। जिन लाभार्थियों को पहले “लक्ष्मीर भंडार” योजना का लाभ मिलता था, उन्हें अब इस नई अन्नपूर्णा भंडार योजना में शामिल किया जाएगा, जिसके लिए जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग सीएए के तहत आवेदन कर चुके हैं या ट्रिब्यूनल में अपील कर चुके हैं, वे भी इस नई योजना का लाभ उठा सकेंगे। धार्मिक भत्तों को बंद करने के इस फैसले पर ऑल बंगाल इमाम मुअज्जिन एसोसिएशन जैसे संगठनों की ओर से पहले भी विरोध के स्वर उठ चुके हैं, ऐसे में इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद राज्य की राजनीति और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छिड़ना तय माना जा रहा है।

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