नई दिल्ली: बांग्लादेश की नवनिर्वाचित तारिक रहमान सरकार और पाकिस्तान के बीच संबंधों में एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती अंतरिम सरकार की पहल को आगे बढ़ाते हुए ढाका ने अपने १२ वरिष्ठ नौकरशाहों को एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए पाकिस्तान भेजा है। सन् १९७१ में बांग्लादेश की आजादी के बाद यह पहला मौका है जब वरिष्ठ स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए इस तरह का व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रम पाकिस्तान में आयोजित किया गया है।
इस प्रशिक्षण दल में एडिशनल सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी शामिल हैं, जो लाहौर स्थित प्रतिष्ठित ‘सिविल सर्विस एकेडमी’ में मिड-करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा बने हैं। प्रशिक्षण के लिए विशेष रूप से वाणिज्य, लोक प्रशासन, गृह मंत्रालय और कैबिनेट डिवीजन जैसे संवेदनशील विभागों के अधिकारियों को चुना गया है। इस कार्यक्रम का एक उल्लेखनीय पहलू यह भी है कि इसका पूरा वित्तीय भार पाकिस्तान सरकार वहन कर रही है और इसमें बांग्लादेश की ओर से कोई वित्तीय योगदान नहीं है।
रणनीतिक रूप से इस कदम को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जुलाई २०२४ में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से ही बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच प्रशासनिक और कूटनीतिक जुड़ाव में तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शासन और प्रशासन में मुख्य भूमिका निभाने वाले इन मंत्रालयों के अधिकारियों का पाकिस्तान के साथ जुड़ाव इस्लामाबाद को ढाका की प्रशासनिक व्यवस्था तक गहरी पहुंच प्रदान कर सकता है। लाहौर में आयोजित इस सत्र का उद्देश्य दोनों देशों की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच तुलनात्मक अध्ययन को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।
क्षेत्रीय राजनीति में तारिक रहमान सरकार के इस कदम को एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो पिछली सरकारों की विदेश नीति से काफी भिन्न है। एक ओर जहां पाकिस्तान के साथ यह नजदीकियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर तीस्ता जल समझौते पर चीन के साथ चर्चा और अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौतों की शर्तों को लेकर भी ढाका में नई बहस छिड़ी हुई है। कुल मिलाकर, तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश अपनी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित करता नजर आ रहा है।









