कर्मचारियों के अधिकारों में कटौती का आरोप, अध्यादेश के खिलाफ अदालत जाने की तैयारी

sanghiya_mamila_ministry-760x500-1

काठमांडू: प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से कर्मचारियों को आश्वस्त करने का प्रयास कर्मचारियों को संतुष्ट नहीं कर पाया है। सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश के जरिए आधिकारिक ट्रेड यूनियन व्यवस्था समाप्त किए जाने के बाद विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अदालत जाने की तैयारी की है।
नेपाल निजामती कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष उत्तमकुमार कटुवाल ने कहा कि अधिकारों में कटौती स्वीकार्य नहीं है और वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने पहले अधिकार देकर बाद में छीनने की प्रवृत्ति पर आपत्ति जताई।
नेपाल निजामती कर्मचारी संगठन की अध्यक्ष भगवती न्यौपाने दाहाल ने भी बताया कि कानूनी सलाह ली जा रही है और जल्द ही अदालत का रुख किया जाएगा। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह निर्णय संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अध्यादेश कर्मचारियों के अधिकार नहीं छीनता, बल्कि पेशागत स्वतंत्रता को मजबूत करता है और नियुक्ति तथा पदोन्नति में योग्यता को प्राथमिकता देता है। साथ ही कर्मचारियों के लिए शिकायत और पुनर्विचार की व्यवस्था भी रखी गई है।
नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता देवराज चालिसे ने कहा कि आधिकारिक ट्रेड यूनियन को समाप्त करना संविधान के विपरीत हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत जाना नागरिकों का अधिकार है।
फिलहाल कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन की बजाय कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर दिया है।

About Author

Advertisement