झापा: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ के नतीजे न केवल भारत के लिए बल्कि पड़ोसी देश नेपाल के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। दार्जिलिंग जिले का पानीटंकी और नेपाल के झापा का काकड़भिट्टा सीमा क्षेत्र दोनों देशों के बीच व्यापार और आवागमन का मुख्य द्वार है। पिछले वर्ष नेपाल में हुए राजनीतिक बदलाव और जनरेशन जेड के आंदोलन के दौरान तत्कालीन ओली सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद बालेन शाह प्रधानमंत्री बने थे। उस दौरान पानीटंकी सीमा पर ट्रकों की लंबी कतारें लगने से नेपाल की आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई थी, यही वजह है कि बालेन शाह सरकार बंगाल के चुनाव परिणामों पर पैनी नजर रखे हुए है।
पानीटंकी एक महत्वपूर्ण लैंड पोर्ट है जहाँ से राष्ट्रीय राजमार्ग और एशियाई राजमार्ग के माध्यम से कोयला, सीमेंट और खाद्य सामग्री नेपाल भेजी जाती है, जबकि नेपाल से चाय और प्लाईवुड जैसे उत्पादों का आयात होता है। सामरिक रूप से यह क्षेत्र ‘चिकन नेक’ यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब है, जो भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाली एकमात्र संकरी पट्टी है। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और चीन की सीमाओं के करीब होने के कारण इसकी सुरक्षा बहुत संवेदनशील है। भारत सरकार इस कॉरिडोर को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए यहाँ ४ं० किलोमीटर लंबी रेलवे सुरंग का निर्माण कर रही है।
चुनाव के मद्देनजर सीमा पार से घुसपैठ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े इंतजाम किए गए हैं। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को हाई अलर्ट पर रखा गया है और खुफिया विभाग सीमावर्ती इलाकों में निरंतर निगरानी कर रहा है। नेपाल के लिए खान-पान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की निर्भरता इसी सीमावर्ती क्षेत्र पर टिकी है, इसलिए बंगाल की सत्ता में कोई भी बदलाव बालेन शाह सरकार की नीतियों और सीमा सुरक्षा प्रबंधन को प्रभावित कर सकता है। इन परिस्थितियों में बंगाल चुनाव के परिणाम दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से अत्यंत निर्णायक साबित होंगे।











