नेपाल रेल नेटवर्क: चीन और भारत की बढ़ती सक्रियता और वर्तमान स्थिति

Nepal_Railway,_Janakpur_20200918

काठमांडू: ​नेपाल में रेलमार्ग निर्माण को लेकर चीन और भारत के बीच कूटनीतिक और तकनीकी होड़ तेज हो गई है। ताजा जानकारी के अनुसार, चीनी विशेषज्ञों की टीम काठमांडू-केरुंग रेलमार्ग की व्यवहार्यता अध्ययन रिपोर्ट अगले १.५ महीने के भीतर नेपाल सरकार को सौंपने वाली है। हाल ही में चीनी तकनीकी दल ने नेपाल के भौतिक बुनियादी ढांचा और यातायात मंत्रालय को इस परियोजना की डिजाइन और संभावित लागत के बारे में प्रारंभिक जानकारी दी है।
​चीनी अध्ययन के मुताबिक, नेपाल की सीमा के भीतर पड़ने वाले ७२ किलोमीटर लंबे रेलमार्ग का ९५% से अधिक हिस्सा सुरंगों और पुलों के माध्यम से गुजरेगा। इसमें ६८.६ किलोमीटर लंबी सुरंग और २.६ किलोमीटर लंबे पुल प्रस्तावित हैं। २०१९ में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नेपाल यात्रा के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अध्ययन के लिए समझौता हुआ था। नेपाल सरकार रिपोर्ट मिलने के बाद ही इसके निवेश मॉडल और निर्माण की रूपरेखा पर चर्चा करेगी।
​वहीं दूसरी ओर, भारत ने रक्सौल-काठमांडू रेलमार्ग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है। भारतीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब के दौरान बताया कि १३६ किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन का अंतिम स्थल सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। नेपाली अधिकारियों ने इस परियोजना के संबंध में चार प्रमुख सुझाव दिए हैं, जिनमें निजगढ हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी, कुलेखानी बांध की सुरक्षा, स्थानीय खदानों का संरक्षण और काठमांडू-निजगढ एक्सप्रेसवे के यातायात को प्रभावित न करने जैसे बिंदु शामिल हैं।
​रक्सौल-काठमांडू रेलमार्ग की अनुमानित लागत लगभग ३.८४ लाख करोड़ नेपाली रुपये होने का अनुमान है, जिसमें कुल १२ स्टेशन प्रस्तावित हैं। नेपाल की वर्तमान सत्ताधारी पार्टी ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ ने भी अपने घोषणापत्र में चीन और भारत के साथ रेल संपर्क स्थापित करने का वादा किया है। दोनों ही पड़ोसी देशों की इन रेल परियोजनाओं को नेपाल के भविष्य के यातायात और व्यापारिक विकास के लिए अत्यंत रणनीतिक माना जा रहा है।

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