नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरिक ओ’ब्रायन के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि संशोधित मतदाता सूची जारी होने के बाद तृणमूल की असहजता उनके राजनीतिक असुरक्षा की झलक है।
डेरिक ओ’ब्रायन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने एक सामाजिक माध्यम मंच पर लिखा कि उनके द्वारा चुने गए आंकड़े उसी सत्य को और अधिक स्पष्ट करते हैं, जिसे वे नकारने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार, अवैध घुसपैठियों, फर्जी नामों और संदिग्ध प्रविष्टियों को मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद मतदान प्रतिशत स्वाभाविक रूप से एक अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय आधार को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि बंगाल के लोगों की भागीदारी अत्यंत सकारात्मक रही है, क्योंकि संशोधन के बाद भी तीन करोड़ से अधिक नागरिकों ने मतदान किया है। उनके अनुसार यह इस बात का प्रमाण है कि पश्चिम बंगाल के लोग भय या राजनीतिक दबाव के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर विश्वास कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के बजाय तृणमूल कांग्रेस जिन नामों को सूची से हटाया गया है, उन्हें लेकर रक्षात्मक रुख अपना रही है, जो राजनीतिक रूप से प्रश्न उठाता है। उनके अनुसार, जो लोग वर्षों तक त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची और नियंत्रित मतदान व्यवस्था के आधार पर शासन करते रहे, वही आज चुनावी पारदर्शिता को लेकर चिंतित हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि तृणमूल के भीतर दिखाई दे रही अस्थिरता केवल आंकड़ों का विषय नहीं है, बल्कि वास्तविक मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि परिणाम घोषित होने के दिन बंगाल की जनता का फैसला ही अंतिम होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बंगाल में कमल के शांत लेकिन निरंतर प्रस्फुटन को लेकर होगी।











