‘जलसा’ को लेकर अमिताभ का भावुक संदेश

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मुंबई: मुंबई का वह प्रसिद्ध बंगला, जिसके बाहर हर रविवार हजारों प्रशंसक एकत्रित होते हैं। वह ‘जलसा’ आज केवल एक आलीशान आवास नहीं, बल्कि तीन दशकों के प्रेम, आशीर्वाद और संयुक्त परिवार का जीवंत प्रतीक बन चुका है। हाल ही में महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में ‘जलसा’ को लेकर एक लंबा और भावुक संदेश साझा किया।


बिग बी ने अपने प्रशंसकों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्हें वह स्नेह से अपना ‘विस्तारित परिवार’ कहते हैं। हर सप्ताह व्यस्त जीवन से समय निकालकर जो लोग उनके घर के सामने एकत्र होते हैं, उनके वे कुछ मिनट अमिताभ के लिए किसी दैवी शक्ति से कम नहीं हैं। उन्होंने लिखा, “आप अपने व्यस्त जीवन से मेरे लिए जो कुछ मिनटों का प्रेम और आशीर्वाद निकालते हैं, वह मेरे लिए ईश्वर की उपस्थिति के समान है।
अमिताभ के लिए ‘जलसा’ केवल एक छत नहीं, बल्कि लाखों लोगों की शुभकामनाओं से पवित्र स्थान है। पिछले ३० से अधिक वर्षों से यह घर बच्चन परिवार को आश्रय देता आ रहा है। स्मृतियों को याद करते हुए अभिनेता ने लिखा कि इस घर ने उनके बच्चों का जन्म देखा है। उनके विवाह का साक्षी बना है यह आंगन। यहीं उनके बच्चे बड़े हुए और अब उनके बच्चे (नातिनें) भी यहीं पर बड़ी हो रही हैं। उनके अनुसार यह घर आनंद और खुशियों का प्रतिबिंब है। यह जीवन के उत्सव और समय के साथ बहते अटूट संबंधों का अनूठा प्रमाण है।
पिछले महीने भी अपने ब्लॉग में उन्होंने दैनिक जीवन की भाषा को लेकर एक रोचक टिप्पणी साझा की थी। उन्होंने देखा कि हमारी रोजमर्रा की बातचीत में गाड़ी और क्रिकेट का कितना प्रभाव है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हम अक्सर कहते हैं कि कठिन परिश्रम में “गति अवरोध” आ गया, या रफ्तार बढ़ाने के लिए “त्वरक” दबाने की बात करते हैं। यहां तक कि खतरे का आभास होते ही “ब्रेक” लगाने जैसे शब्द भी हमारी भाषा का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।

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